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वोटिंग से पहले BAN की बदलने लगी जुबान, सीनियर मंत्री को आई भारत की याद

February 06, 2026

डेस्क: बांग्लादेश में आम चुनाव से पहले भारत को लेकर सुर बदलने लगे हैं. देश के विदेश मामलों के सलाहकार तौहीद हुसैन ने कल गुरुवार को यह स्वीकार किया कि मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार के दौरान भारत के साथ संबंधों में “झटका” लगा, हालांकि यह उम्मीद भी जताई कि अगले हफ्ते होने वाले चुनावों के बाद चुनी हुई सरकार के तहत संबंध फिर से बेहतर हो जाएंगे.

हुसैन ने चुनावों से एक हफ्ते पहले पत्रकारों से कहा, “अंतरिम सरकार के दौरान भारत के साथ संबंधों में कुछ रुकावटें जरूर आईं, लेकिन वे (संबंध) महत्वपूर्ण बने रहे.” बांग्लादेश में अगस्त 2024 में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बीच शेख हसीना की सरकार का तख्तापलट किए जाने के बाद देश का यह पहला चुनाव है.

हुसैन, जो एक पूर्व करियर राजनयिक हैं और भारत में उप उच्चायुक्त के रूप में भी काम कर चुके हैं, ने उम्मीद जताई कि देश की अगली चुनी हुई सरकार कुछ तरीके ढूंढकर संबंधों को और बेहतर बनाने की कोशिश करेगी. बांग्लादेश में अगले हफ्ते 12 फरवरी को 13वां आम चुनाव कराया जाएगा.


  • हालांकि देश में वोटिंग में अभी कुछ दिन बचे हैं, लेकिन यूनुस सरकार के कई मंत्री चुनाव परिणाम आने से पहले ही देश छोड़ कर भागने की तैयारी में लग गए हैं. कई मंत्री यानी सलाहकार अपने राजनयिक पासपोर्ट जमा कराने लगे हैं. उन्हें उम्मीद है कि ऐसा करने से उन्हें देश से बाहर जाने के लिए आसानी से वीजा मिल जाएगा. कई तो अप्लाई भी कर चुके हैं.

    विदेश मंत्री ने यह नहीं बताया कि कौन-कौन मंत्री बाहर जाने की फिराक में हैं. लेकिन वित्त मामलों के मंत्री डॉ. सालेहुद्दीन अहमद और मोहम्मद फौजुल कबीर खान के पासपोर्ट सरेंडर की बात की जा रही है.

    बांग्लादेश में साल 2024 में छात्रों की अगुवाई वाले हिंसक विरोध प्रदर्शन जिसे जुलाई विद्रोह भी कहा जाता है, के बाद 5 अगस्तर 2024 में शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को उखाड़ फेंका गया था, खुद हसीना को देश छोड़कर भारत वापस लौटना पड़ा था. इसके बाद नोबल पुरस्कार विजेता यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार का गठन किया गया. इसके बाद से 78 साल की हसीना भारत में रह रही हैं. जबकि दोनों देशों के बीच रिश्तों में काफी गिरावट आ गई.

    पिछले साल एक विशेष बांग्लादेशी ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई थी, उन पर विरोध प्रदर्शनों को बेरहमी से कुचलने की कोशिश करने और मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया था, साथ ही ढाका ने बार-बार हसीना को न्याय का सामना करने के लिए प्रत्यर्पित करने की मांग की गई.

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