
नई दिल्ली । उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन (Vice President CP Radhakrishnan) ने कहा कि भारतरत्न नानाजी देशमुख (Bharat Ratna Nanaji Deshmukh) ने अपना जीवन समाज के आखिरी व्यक्ति की भलाई के लिए समर्पित कर दिया (Dedicated his life for the welfare of the Last Person in the Society) । समाज सुधारक और प्रबुद्ध राष्ट्र सेवक भारतरत्न नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को उपराष्ट्रपति भवन में पुष्पांजलि अर्पित की।
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “एक समाज सुधारक और राजनेता, नानाजी देशमुख अंत्योदय की सोच में पूरा यकीन रखते थे, उन्होंने अपना जीवन समाज के आखिरी व्यक्ति की भलाई के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने इमरजेंसी के दौरान लोक नायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में “संपूर्ण क्रांति” आंदोलन में अहम भूमिका निभाई, और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने के लिए बिना थके काम किया।” उन्होंने आगे लिखा कि उन्हें हमेशा ग्रामीण विकास, सामाजिक बदलाव और पूरी जिंदगी राष्ट्र-निर्माण की लगन के लिए प्यार से याद किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारतीय जनसंघ के संस्थापक सदस्य ‘भारत रत्न’ नानाजी देशमुख की पुण्यतिथि पर उन्हें कोटिशः नमन। ‘राष्ट्रऋषि’ नानाजी देशमुख ने अपना संपूर्ण जीवन ग्रामीण भारत के उत्थान, शिक्षा के प्रसार और आत्मनिर्भर समाज के निर्माण हेतु समर्पित कर दिया। समाज सेवा उनके लिए विचार नहीं, साधना थी। उनका समर्पित जीवन आज भी राष्ट्रनिर्माण के पथ पर हम सभी को प्रेरित करता है।”
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “दूर की सोचने वाले समाज सुधारक और भारत रत्न नानाजी देशमुख को उनकी पुण्यतिथि पर याद करते हुए। आरएसएस के एक समर्पित प्रचारक, नानाजी देशमुख ने अपना जीवन ग्रामीण विकास, शिक्षा और आत्मनिर्भर गांवों के विजन को आगे बढ़ाने के लिए समर्पित कर दिया, जो सच में अंत्योदय की भावना को दर्शाता है। उनका जीवन और काम हम सभी को प्रेरित करता रहता है।”
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत रत्न, ‘राष्ट्र ऋषि’ श्रद्धेय नानाजी देशमुख जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। नानाजी का संपूर्ण जीवन निस्वार्थ सेवा और समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान की अमिट प्रेरणा है। उन्होंने राजनीति को सत्ता का माध्यम नहीं, अपितु लोक-कल्याण और शुचिता का मार्ग बनाया।” उन्होंने आगे लिखा कि सक्रिय राजनीति के शिखर पर रहते हुए उन्होंने अपना जीवन ग्रामीण भारत के स्वावलंबन हेतु समर्पित कर दिया। ‘ग्रामोदय से राष्ट्रोदय’ के उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण ने देश को आत्मनिर्भरता की नई दिशा दिखाई। सादगी और सेवा के प्रति उनका यह अनन्य समर्पण हमें जनसेवा के लिए निरंतर प्रेरित करता रहेगा।
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