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माओवाद को बड़ा झटका: शीर्ष नेता देवजी के आत्मसमर्पण की खबर, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

February 22, 2026

हैदराबाद। वामपंथी उग्रवाद (Leftist Extremism) के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच बड़ी खबर सामने आई है। प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (CPI) के महासचिव टिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी (Tirupati alias Devji) के आत्मसमर्पण की सूचना मिली है। बताया जा रहा है कि करीब 60 वर्षीय देवजी ने तेलंगाना के मुलुगु जिले में पुलिस के सामने हथियार डाल दिए।
हालांकि इस घटनाक्रम की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां इसे नक्सल आंदोलन के लिए बड़ा झटका मानकर चल रही हैं।

सूत्रों के मुताबिक हाल के महीनों में तेलंगाना से जुड़े कई माओवादी कैडर पड़ोसी राज्यों में आत्मसमर्पण कर चुके हैं और अब देवजी का नाम सामने आने से संगठन की संरचना पर गंभीर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

कौन है देवजी?

जानकारी के अनुसार देवजी पर 25 लाख रुपये का इनाम घोषित था। वह मूल रूप से करीमनगर जिले के निवासी बताए जाते हैं और लंबे समय से संगठन की केंद्रीय गतिविधियों में सक्रिय थे। करीब आठ महीने पहले ही उन्हें संगठन का महासचिव बनाया गया था।

इससे पहले मई 2025 में सुरक्षा बलों ने तत्कालीन शीर्ष नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजू को एक बड़े अभियान में मार गिराया था। यदि देवजी के आत्मसमर्पण की पुष्टि होती है, तो एक वर्ष के भीतर दूसरी बार संगठन शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर कमजोर पड़ता दिखाई देगा।

अन्य कैडरों के भी सरेंडर की संभावना

सूत्रों का कहना है कि देवजी के साथ 15–20 सशस्त्र कैडरों के भी आत्मसमर्पण करने की संभावना है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब केंद्र सरकार देशभर में माओवादी गतिविधियों के खिलाफ दबाव बढ़ा रही है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च 2026 तक देश में माओवादी हिंसा समाप्त करने का लक्ष्य रखा है। इसी दिशा में चलाए जा रहे सुरक्षा अभियानों के तहत कई राज्यों में संयुक्त ऑपरेशन तेज किए गए हैं।

आधिकारिक पुष्टि का इंतजार, एजेंसियां सतर्क

नक्सल विरोधी अभियानों से जुड़ी तेलंगाना पुलिस की विशेष इकाइयां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों ने अभी सार्वजनिक टिप्पणी से परहेज किया है।
पिछले एक वर्ष में संगठन के कई वरिष्ठ नेताओं के मारे जाने या आत्मसमर्पण करने से इसकी नेतृत्व संरचना पर लगातार दबाव बना हुआ है।

इससे पहले पोलित ब्यूरो सदस्य मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ सोनू के आत्मसमर्पण को भी संगठन के लिए बड़ा झटका माना गया था।

क्या बदलेगा नक्सल विरोधी अभियान का समीकरण?

विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि देवजी का आत्मसमर्पण आधिकारिक रूप से पुष्टि होता है, तो यह किसी सरकारी एजेंसी के सामने सरेंडर करने वाले अब तक के सबसे उच्च पदस्थ माओवादी नेताओं में गिना जाएगा।
इससे न केवल संगठन की रणनीतिक क्षमता प्रभावित हो सकती है, बल्कि सुरक्षा बलों के मनोबल और अभियान की गति भी तेज होने की संभावना है।

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