
पटना: आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह ने बिल गेट्स फाउंडेशन और कई सरकारी अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. दरअसल सुधाकर सिंह बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि बिल गेट्स फाउंडेशन भारत में मेडिकल रिसर्च के नाम पर बच्चियों पर प्रयोग कर रही है. उन्होंने दावा किया कि HPV वैक्सीन कार्यक्रम के तहत स्कूली बच्चियों पर ट्रायल किए गए, जिनके गंभीर दुष्प्रभाव सामने आए. सांसद ने कहा कि इस पूरे मामले की जानकारी उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी दी है, लेकिन अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है.
सुधाकर सिंह ने कहा कि बिल गेट्स फाउंडेशन बिहार में मेडिकल रिसर्च सेवाओं को कंट्रोल कर रही है. अमेरिकी संस्था बिल गेट्स फाउंडेशन द्वारा एचपीवी वैक्सीन का ट्रायल भारत में स्कूली बच्चियों पर किया गया. गर्भाशय कैंसर ना हो उसके लिए वैक्सीन बच्चियों को दी गई जिससे कुछ बच्चे की मौत हो गई और कुछ बच्चियों हमेशा मां नही बन सकती है. यह परिणाम आया भारत के बच्चियो को चूहा और बंदर के तरह प्रयोग के लिए उपयोग किया गया. सुधाकर सिंह ने कहा कि गुजरात और आंध्र प्रदेश की स्कूल की बच्चियों की मौत हुई इन बातों का सबूत है.
सुधाकर सिंह ने कहा कि बृजेश पाठक तत्कालीन अध्यक्ष स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय राज्यसभा की संसदीय स्थाई समिति के संस्था में 30 अगस्त 2013 को समिति का 72वां रिपोर्ट प्रकाशित किया, जिसमें गेट्स फाउंडेशन के द्वारा फंडेड गर्भाशय ग्रीवा कैंसर एच पी वि वैक्सीनेशन परिणाम और उससे हुई मौत का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है. सुधाकर सिंह ने कहा कि बिल गेट्स फाउंडेशन भारत में दान के नाम पर अपने दवाइयां का एक्सपेरिमेंट कर रहा है. और इस काम में भारत के अधिकारी शामिल है बिहार राज्य में भी एचपीवी वैक्सीन का उपयोग बिहार की स्कूल की बच्चियों पर किया गया है, जिसको लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मैंने जानकारी भी दी है मगर अभी तक मुझे इसका कोई जवाब नहीं मिला है.
सुधाकर सिंह ने अपने बयान में कहा कि वैक्सीनेशन कार्यक्रम के दौरान कुछ बच्चियों की मौत और स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं के मामले सामने आए थे. उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब दान और स्वास्थ्य सेवा के नाम पर किया गया और इसमें भारत के कई अधिकारी भी शामिल रहे. इस मुद्दे पर उन्होंने 30 अगस्त 2013 को प्रकाशित संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला दिया. उनके अनुसार उस समय समिति से जुड़े बृजेश पाठक के कार्यकाल में प्रस्तुत रिपोर्ट में वैक्सीनेशन कार्यक्रम और उसके परिणामों को लेकर सवाल उठाए गए थे. रिपोर्ट में टीकाकरण की प्रक्रिया, निगरानी व्यवस्था और अनुमति प्रणाली पर गंभीर टिप्पणी की गई थी.
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