
मुंबई। महाराष्ट्र (Maharashtra) के नगर निगम चुनाव (Municipal Elections) परिणामों ने यह साबित कर दिया है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) गठबंधन को विधानसभा (Assembly) चुनाव में मिली जीत कोई तुक्का नहीं थी। वह महिलाओं (Women) और युवाओं को साधने की भाजपा बहुत सोची-समझी रणनीति थी जिस पर जनता ने एक बार फिर निगम चुनाव में मुहर लगाया है। इस जीत से राज्य और भाजपा में इस जीत के नायक देवेन्द्र फडणवीस का कद और ऊंचा हो गया है।
मुंबई नगर निगम में सत्ता खोने के बाद निगम से ठाकरे युग का अंत होता दिखाई दे रहा है। उद्धव ठाकरे को समझना पड़ेगा कि बाला साहब ठाकरे के सिद्धांतों से समझौता उनके लिए बहुत भारी पड़ा है। इस चुनाव में बाला साहब ठाकरे के रहे सहे समर्थकों ने भी उद्धव का साथ छोड़ दिया है। ठाकरे परिवार की ‘टकसाल’ कहे जाने वाले मुंबई नगर निगम से अब ठाकरे परिवार को आर्थिक संजीवनी नहीं मिलेगी। ऐसे में अब शिवसेना (उद्घव ठाकरे गुट) की राजनीति कितनी आगे बढ़ पाएगी, यह बड़ा सवाल है।
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव में कांग्रेस को एक बार फिर करारी हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस ने इसके लिए एक बार फिर चुनाव में ‘फ्रॉड’ होने का आरोप लगाया है। राहुल गांधी ने ट्वीट कर चुनाव में इस्तेमाल होने वाली स्याही पर सवाल खड़ा किया है। लेकिन कांग्रेस के अंदर भी इस बात पर हलचल तेज हो गई है कि आखिर कब तक केवल ईवीएम और स्याही पर सवाल उठाकर कांग्रेस नेता अपनी जिम्मेदारी से भागेंगे? महाराष्ट्र की जनता ने कांग्रेस को स्पष्ट जनादेश दिया है कि उसे अपनी चुनावी रणनीति पर फिर से विचार करना चाहिए।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने अमर उजाला से कहा कि महाराष्ट्र की जनता ने यह साबित कर दिया है कि अब ट्रिपल इंजन की सरकार का दौर आ चुका है। देश के अनेक राज्यों में डबल इंजन की सरकार चल रही है, लेकिन जिस तरह नगर निगम चुनाव में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को जीत मिल रही है, उससे यह स्पष्ट हो गया है कि अब जनता हर स्तर पर विकास के लिए भाजपा पर भरोसा कर रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को केवल आरोप लगाने की बजाय जमीनी सच्चाई को समझते हुए अपने विषय में विचार करना चाहिए।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि भाजपा और महायुति ने बीएमसी चुनाव में शानदार सफलता हासिल की है। महाराष्ट्र की जनता को धन्यवाद देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि महाराष्ट्र की धरती भारत की सांस्कृतिक एकता का प्रतीक रही है। मुम्बई में इस जीत के लिए उन्होंने युवाओं का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि मुंबई की जेन जी ने विकसित भारत के लिए वोट किया है। इसके पहले केरल के निगम चुनाव में भी भाजपा को सफलता मिली थी।
सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि इन चुनावों का एक सीधा संदेश यह भी है कि अब देश की जनता नकारात्मक सोच की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि इस चुनाव ने इंडिया गठबन्धन के अस्तित्व पर भी सवाल उठा दिया है। इन चुनावों में जिस तरह कांग्रेस और उद्धव ठाकरे के एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी की है, उससे यह स्पष्ट होता है कि इंडिया गठबन्धन के दलों ने ही गठबन्धन के अस्तित्व को नकार दिया है।
राज्यसभा सांसद त्रिवेदी ने कहा कि जाकिर नाईक और अफजल गुरु के साथ खड़े होने के कारण विपक्ष लगातार हार का सामना कर रहा है लेकिन इसके बाद भी वह अपनी गलती को समझना नहीं चाहता। उन्होंने कहा कि बाला साहब ठाकरे की सैद्धांतिक राजनीति से भटकने के कारण उद्धव ठाकरे को इस करारी हार का सामना करना पड़ रहा है। बाला साहब ठाकरे की सोच से उल्ट आज उद्धव ठाकरे पाकिस्तान, बाबरी मस्जिद का निर्माण करने वालों के साथ खड़े दिख रहे हैं। यही कारण है कि उन्हें लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है।
भाजपा महासचिव तरुण चुग ने कहा कि इन चुनाव परिणामों के आने के पहले ही विपक्ष ने चुनाव में मतदान में उपयोग होने वाली स्याही पर सवाल उठा दिया। राहुल गांधी अपनी गलती को स्वीकार करने और उसे ठीक करने की बजाय कभी ईवीएम तो कभी स्याही पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता का आशीर्वाद विकास और राष्ट्रवाद के साथ है, लेकिन विपक्ष मूल बात को समझने की बजाय दूसरे मुद्दे उठा रहा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अपनी राजनीतिक सोच पर मंथन किया जाना चाहिए।
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