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बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से ब्लैकआउट जैसे हालात, निजीकरण के विरोध में स्ट्राइक

October 22, 2026

गुड़गांव। हरियाणा में बिजली निगम के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल का असर गुरुग्राम में दिखाई देने लगा है। गुरुग्राम में ब्लैकआउट जैसे हालात हैं। शहर के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बिजली संकट का असर पेयजल आपूर्ति पर भी पड़ा है। बिजली निगम में महज 12 घंटे के भीतर बिजली आपूर्ति से जुड़ी 3,000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई हैं।

बिजली निगम के कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार रात 10 बजे शुरू हुई। इसके बाद गुरुग्राम के अलग-अलग इलाकों से बिजली गुल होने की शिकायतें आने लगीं। कर्मचारियों के मुताबिक, रात में बिजली निगम को 945 शिकायतें मिलीं, जबकि सुबह के शुरुआती दो घंटों में ही 2,245 शिकायतें दर्ज की गईं। इस तरह करीब 12 घंटे में शिकायतों की संख्या 3,000 के पार पहुंच गई। ऑनलाइन माध्यमों और कॉल सेंटर पर भी लगातार शिकायतें आ रही हैं।

बिजली निगम के कर्मचारी सरकार के निजीकरण संबंधी फैसले का विरोध कर रहे हैं। यूनियन पदाधिकारियों का आरोप है कि सरकार की ओर से उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, जिसके चलते उन्हें हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने पहले भी सरकार को चेतावनी दी थी, लेकिन उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ। कर्मचारियों के हड़ताल पर जाने के बाद बिजली लाइनों में आने वाले फॉल्ट को ठीक करने का काम प्रभावित हुआ है। यूनियन पदाधिकारियों का दावा है कि गुरुग्राम के करीब 40 प्रतिशत हिस्से में बिजली आपूर्ति ठप होने जैसी स्थिति पैदा हो गई है।


  • बिजली आपूर्ति बाधित होने से आम लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कई इलाकों में पानी की आपूर्ति पर भी असर पड़ा है। बिजली नहीं होने के कारण लोगों को रोजमर्रा के काम निपटाने में परेशानी हो रही है। घरों में खाना बनाने से लेकर पानी की व्यवस्था करने तक में दिक्कतें सामने आ रही हैं।

    बिजली निगम के कर्मचारियों की मानें तो अब तक वह सरकार के झूठे आश्वासनों में आकर अपने आंदोलन को रोक देते थे, लेकिन इस बार वह आरपार की लड़ाई के मूड में हैं। बिजली कर्मचारी यूनियनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार निजीकरण का फैसला वापस लेने और लंबित मांगों पर बातचीत करने के लिए तैयार नहीं होती है, तो तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल को अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदला जा सकता है। कर्मचारियों का कहना है कि 24 तारीख को संयुक्त संघर्ष समिति के साथ बातचीत कर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

    कर्मचारियों ने यह भी कहा है कि वे इस बार केवल आश्वासनों के आधार पर आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। उनका कहना है कि निजीकरण का फैसला वापस लेने और लंबित मांगों पर ठोस निर्णय होने के बाद ही आंदोलन को लेकर आगे विचार किया जाएगा।

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