
तेहरान। पश्चिम एशिया (West Asia) में ईरान (Iran) के खिलाफ युद्ध शुरू करने वाले अमेरिका (America) के लिए हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। ब्रिक्स देशों (BRICS Countries) को अमेरिका विरोधी मानने वाले ट्रंप प्रशासन पर अब ब्राजील ने तगड़ा ऐक्शन लिया है। पिछले साल ब्राजीलियाई अधिकारियों के खिलाफ अमेरिकी ऐक्शन का बदला लेते हुए ब्राजील सरकार ने भी एक अमेरिकी अधिकारी का वीजा रद्द कर दिया है।
ब्राजील के राष्ट्रपति लुइस लूला डा सिल्वा (Brazilian President Luís Lula da Silva) ने अमेरिकी अधिकारी डैरेन बीटी (US official Darren Beatty) के वीजा को रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि बीटी के खिलाफ यह फैसला पिछले साल अगस्त में अमेरिका की तरफ से ब्राजीलियाई अधिकारियों के खिलाफ उठाए गए फैसले का जवाब है। गौरतलब है कि अगस्त में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कुछ ब्राजीलियाई अधिकारियों के वीजा रद्द करके उनके अधिकारों को सीमित कर दिया था।
क्या है मामला?
अमेरिकी अधिकारी डैरेन बीटी ने ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट से जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति बोलसोनारो से मिलने की अनुमति मांगी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने मोरेस ने उनकी अनुमति को खारिज कर दिया। लूला ने बीटी की अनुमति खारिज होने पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीटी दावा कर रहे हैं कि वह यहां पर बोलसोनारो से मिलने के लिए आए हैं। लेकिन उन्हों तब तक ब्राजील में प्रवेश नहीं मिलेगा, जब तक की ब्राजील के स्वास्थ्य मंत्री और उनके परिवार को वीजा बहाल नहीं कर दिया जाता। उन्होंने कहा, “वह अमेरिकी व्यक्ति जिसने कहा था कि वह यहाँ बोलसोनारो से मिलने आया है, उसे ऐसा करने से रोक दिया गया है।”
आपको बता दें, ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति बोलसोनारो को अमेरिकी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन प्राप्त है। बोलसोनारो को ब्राजील में 2023 में तख्तापलट की कोशिश करने का आरोप है। ब्राजील के सुप्रीम कोर्ट ने इस उन्हें 27 साल की सजा सुनाई थी, जिसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया।
जेल में बंद पूर्व राष्ट्रपति से अमेरिकी अधिकारी को मुलाकात के प्रस्ताव पर ब्राजील के विदेश मंत्रालय ने चिंता जताई थी। ब्राज़ील सरकार के एक गुमनाम अधिकारी ने एपी को बताया कि बीटी का वीजा आवेदन में यात्रा के उद्देश्य से जुड़ी जानकारी छिपाने और गलत जानकारी देने के कारण रद्द किया गया। इस बीच व्हाइट हाउस ने लूला के फैसले या ब्राज़ील के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
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