
नई दिल्ली: हर साल जैसे ही फरवरी का महीना करीब आता है, देश के करोड़ों नौकरीपेशा और मध्यम वर्गीय परिवारों की निगाहें सिर्फ एक ही तरफ टिकी होती हैं, वित्त मंत्री का बजट भाषण. 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाला मोदी सरकार 3.0 (Modi Government 3.0) का तीसरा पूर्ण बजट केवल आंकड़ों का हिसाब-किताब नहीं है, बल्कि यह आम आदमी की जेब और उसकी बचत का भविष्य तय करने वाला दस्तावेज है.
इस बार का यूनियन बजट (2026-27) अपने आप में बेहद खास और ऐतिहासिक माना जा रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि यह मौजूदा इनकम टैक्स कानून के तहत पेश होने वाला आखिरी पूर्ण बजट होगा. सरकार 1 अप्रैल 2026 से करीब 60 साल पुराने टैक्स कानूनों को बदलकर नया ‘Income Tax Act 2025’ लागू करने की तैयारी में है. ऐसे में, यह बजट न केवल वर्तमान की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि भविष्य की टैक्स व्यवस्था की नींव भी रखेगा. आइए जानते हैं कि इस बार करदाताओं (Taxpayers) को वित्त मंत्री के पिटारे से कौन सी 5 बड़ी राहतों की आस है.
पुराने टैक्स रिजीम वालों का दर्द
पिछले साल यानी बजट 2025 में सरकार ने ‘न्यू टैक्स रिजीम’ को आकर्षक बनाकर खूब सुर्खियां बटोरी थीं. 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स-फ्री करने और बेसिक छूट सीमा को 4 लाख रुपये तक बढ़ाने जैसे फैसलों ने नए सिस्टम को मजबूती दी. लेकिन, इस चकाचौंध में वो लोग खुद को ठगा सा महसूस कर रहे थे जो आज भी ‘ओल्ड टैक्स रिजीम’ (Old Tax Regime) पर भरोसा करते हैं.
पुराने सिस्टम में टैक्स देने वाले लोग पीएफ (PF), होम लोन और इंश्योरेंस के जरिए बचत पर जोर देते हैं. इनकी सबसे बड़ी मांग है कि बेसिक छूट सीमा, जो अभी भी 2.5 लाख रुपये पर अटकी है, उसे बढ़ाया जाए. साथ ही, धारा 80C के तहत मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की छूट अब महंगाई के दौर में नाकाफी साबित हो रही है. टैक्सपेयर्स चाहते हैं कि बच्चों की पढ़ाई और बीमा के खर्च को देखते हुए इस सीमा को बढ़ाकर कम से कम 2 लाख रुपये किया जाए.
घर और इलाज के खर्च पर छूट की दरकार
महंगाई के इस दौर में घर खरीदना और बीमारी का इलाज कराना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है. टैक्सपेयर्स का तर्क है कि राहत सिर्फ टैक्स स्लैब बदलने से नहीं मिलेगी, बल्कि जरूरी खर्चों पर छूट देने से मिलेगी. होम लोन के ब्याज पर मिलने वाली 2 लाख रुपये की छूट अब घर की बढ़ती कीमतों के सामने बहुत कम है.
इसके अलावा, मिडिल क्लास की मांग है कि अगर सरकार ‘न्यू टैक्स रिजीम’ को ही भविष्य बनाना चाहती है, तो उसमें भी कुछ चुनिंदा कटौतियों (Deductions) को शामिल किया जाए. खासकर स्वास्थ्य बीमा और होम लोन पर टैक्स छूट की सुविधा नए सिस्टम में भी दी जानी चाहिए, ताकि बचत और निवेश को प्रोत्साहन मिले.
सिर्फ टैक्स कटौती नहीं, आसान नियमों का भी है इंतजार
आम आदमी सिर्फ टैक्स कम करने की बात नहीं कर रहा, वह सिस्टम के झंझटों से भी मुक्ति चाहता है. अक्सर देखा गया है कि रिटर्न फाइल करने के बाद रिफंड के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है या फिर टीडीएस (TDS) मैचिंग में दिक्कतें आती हैं.
आने वाले नए टैक्स कानून से सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि नियमों को सरल बनाया जाए. ‘असेसमेंट ईयर’ की जगह ‘टैक्स ईयर’ का कॉन्सेप्ट लाने की बात हो रही है. टैक्सपेयर्स को उम्मीद है कि बजट 2026 में कैपिटल गेन टैक्स (Capital Gain Tax) के उलझे हुए जालों को सुलझाया जाएगा. अभी शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और प्रॉपर्टी पर अलग-अलग नियम लागू होते हैं, जिससे कन्फ्यूजन पैदा होता है. लोग चाहते हैं कि सभी एसेट्स के लिए एक समान और सरल व्यवस्था लागू हो.
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