
डेस्क: ग्रीनलैंड (Greenland) को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के हालिया आक्रामक बयानों ने अब एक और सहयोगी देश को खुलकर मैदान में उतार दिया है. डेनमार्क (Denmark) के समर्थन में अब कनाडा (Canada) भी साफ तौर पर अमेरिका के खिलाफ खड़ा नजर आ रहा है. कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने ग्रीनलैंड की राजधानी नूक (Nuuk) का दौरा करने और वहां कनाडा का कॉन्सुलेट खोलने का ऐलान किया है. यह कदम सीधे तौर पर ट्रंप के ग्रीनलैंड पर नियंत्रण के दावों को चुनौती माना जा रहा है.
कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वह आने वाले हफ्तों में नूक जाएंगी. उन्होंने कहा कि ग्रीनलैंड में कनाडा का कॉन्सुलेट खोलना डेनमार्क की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन का ठोस संकेत है. अनिता आनंद ने साफ शब्दों में कहा कि कनाडा, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहता है, खासकर ऐसे समय में जब आर्कटिक क्षेत्र को लेकर वैश्विक तनाव बढ़ रहा है.
असल में, वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और उसके बाद ट्रंप के बयानों ने कई देशों को चौकन्ना कर दिया है. ग्रीनलैंड मुद्दे ने नाटो के भीतर भी चिंता बढ़ा दी है. अमेरिका, डेनमार्क और कनाडा तीनों ही नाटो सदस्य हैं. ऐसे में अगर ट्रंप प्रशासन ग्रीनलैंड को लेकर ज्यदा आक्रामक कदम उठाता है, तो यह नाटो की एकता के लिए बड़ा झटका हो सकता है.
वेनेजुएला में हुई अमेरिकी कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद कनाडा अब ट्रंप की बातों को हल्के में नहीं ले रहा. ओटावा को आशंका है कि ग्रीनलैंड के बाद ट्रंप की नजर आर्कटिक क्षेत्र में अन्य रणनीतिक इलाकों पर भी हो सकती है.इसी वजह से कनाडा पहले ही मोर्चा संभालने में जुट गया है.
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी डेनमार्क के प्रधानमंत्री से बातचीत के बाद कड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि कनाडा और डेनमार्क न सिर्फ सहयोगी हैं, बल्कि आर्कटिक की सुरक्षा की साझा जिम्मेदारी भी निभाते हैं. कार्नी ने दो टूक कहा कि कनाडा हमेशा डेनमार्क की संप्रभुता का समर्थन करेगा, जिसमें ग्रीनलैंड भी शामिल है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि दोनों देश यूरोप और यूक्रेन में शांति बनाए रखने के लिए मिलकर काम करते रहेंगे.
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