वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया में तनाव (Tensions in west asia) कम होने के संकेतों के बीच अमेरिका और ईरान (America – Iran) के बीच सीजफायर की घोषणा भारत के लिए राहत भरी खबर बनकर सामने आई है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दो सप्ताह के युद्ध विराम का ऐलान किया है, वहीं ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सीमित अवधि के लिए खोलने पर सहमति जताई है। इससे भारत में LPG और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ा दबाव कम हो सकता है।
ट्रंप ने कहा कि बातचीत के बाद ईरान पर प्रस्तावित हमले रोकने का फैसला लिया गया है, ताकि होर्मुज जलमार्ग को सुरक्षित तरीके से खोला जा सके। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पुष्टि की कि दो सप्ताह तक जहाजों को सुरक्षित गुजरने दिया जाएगा।
भारत पर क्यों अहम है होर्मुज
तनाव के दौरान ईरान ने जलमार्ग बंद करने का ऐलान किया था, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई।
भारत का करीब 40% कच्चा तेल आयात इसी मार्ग से आता है
50% से ज्यादा LNG की सप्लाई प्रभावित होती है
लगभग 90% LPG पश्चिम एशिया से इसी रास्ते आती है
यही कारण है कि जलमार्ग खुलने से भारत को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
कुछ देशों को दी गई थी अनुमति
ईरान ने बाद में भारत, चीन, रूस, इराक और पाकिस्तान जैसे देशों को सीमित रूप से गुजरने की अनुमति दी थी। इससे कुछ जहाजों की आवाजाही शुरू हुई, लेकिन स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाई थी।
भारतीय जहाजों की स्थिति
पश्चिम एशिया संकट के बीच दो भारतीय LPG टैंकर भारत की ओर बढ़ रहे हैं:
46,650 टन LPG से लदा टैंकर ‘ग्रीन सानवी’ 7 अप्रैल को पहुंचने वाला
15,500 टन गैस लेकर ‘ग्रीन आशा’ 9 अप्रैल तक पहुंचने की उम्मीद
इसके अलावा फारस की खाड़ी में अभी भी 16 जहाज फंसे हैं, जिनमें LNG पोत, LPG टैंकर, कच्चा तेल ले जाने वाले जहाज और कंटेनर पोत शामिल हैं।
घरेलू बाजार को राहत
भारत अपनी रसोई गैस की लगभग 60% जरूरत आयात से पूरी करता है, जिसमें से करीब 90% आपूर्ति पश्चिम एशिया से होती है। ऐसे में होर्मुज दो सप्ताह खुलने से टैंकरों की आवाजाही बढ़ेगी और देश में LPG सप्लाई का दबाव कम होने की संभावना है।
भारत की सालाना LPG खपत 33 मिलियन टन से अधिक है, इसलिए इस सीजफायर को ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बड़ी राहत माना जा रहा है।
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