
नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में लगातार 9वां बजट पेश करेंगी। इस बार बजट से उम्मीद की जा रही है कि वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सीमा शुल्क (Custom Duty) ढांचे में जीएसटी की तर्ज पर बड़े बदलाव और कई अन्य सुधार देखने को मिल सकते हैं। बजट में कर्ज और जीडीपी के अनुपात को कम करने पर भी ध्यान दिया जा सकता है, क्योंकि अब भारत का राजकोषीय प्रबंधन केवल घाटे को संभालने के बजाय कर्ज के बोझ को कम करने की दिशा में बढ़ रहा है।
व्यक्तिगत करदाताओं के लिए, जिन्हें पिछले साल 12 लाख रुपये तक की आयकर छूट और बाद में जीएसटी दरों में कटौती से बड़ी राहत मिली थी, इस बार मानक कटौती यानी स्टैंडर्ड डिडक्शन में और बढ़ोतरी की उम्मीद है। उद्योग जगत को उम्मीद है कि 1 अप्रैल से लागू होने वाले नए और सरल आयकर अधिनियम 2025 के बारे में बजट में स्पष्ट नियम और दिशानिर्देश जारी किए जाएंगे। नई टैक्स व्यवस्था को आकर्षक बनाने के लिए कुछ नए प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं, ताकि ज्यादा लोग पुरानी व्यवस्था को छोड़कर नई व्यवस्था को अपनाएं।
इसके साथ ही टीडीएस की अलग-अलग श्रेणियों और दरों को कम करके उन्हें और सरल बनाया जा सकता है। सीमा शुल्क व्यवस्था में सुधार के तहत दरों को कम करने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर जोर दिया जा सकता है। साथ ही विवादों में फंसे लगभग 1.53 लाख करोड़ रुपये को सुलझाने के लिए एक माफी योजना भी लाई जा सकती है। रक्षा क्षेत्र के लिए बजट आवंटन बढ़ने की संभावना है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर तनाव की स्थिति बनी हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन’ के तहत केंद्र और राज्यों की भागीदारी वाली एक नई योजना के लिए भी बजट का प्रावधान किया जा सकता है।
सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग की घोषणा की उम्मीद है, जिसे 1 जनवरी 2026 से लागू किया जा सकता है। राज्यों को मिलने वाले करों के हिस्से में भी 16वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार बढ़ोतरी हो सकती है। एमएसएमई क्षेत्र और रत्न-आभूषण तथा चमड़ा जैसे उद्योगों के लिए विशेष रियायतों की उम्मीद है। इसके अलावा लिथियम और कोबाल्ट जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के खनन और प्रसंस्करण के लिए भी बजट में फंड दिया जा सकता है।
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