ढाका/नई दिल्ली। बांग्लादेश (Bangladesh) में गंभीर ऊर्जा संकट ने आम जनजीवन के साथ-साथ उद्योग और कृषि क्षेत्र की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। देश के कई हिस्सों में लंबे समय तक बिजली कटौती (Power cut) हो रही है। कुछ इलाकों में रोजाना 10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायतें सामने आई हैं। भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली संकट ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है।
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने बिजली बचाने के लिए कई सख्त कदम उठाए हैं। दुकानों और शॉपिंग मॉल को रात 8 बजे तक बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं सजावटी रोशनी और रात में चलने वाले विज्ञापन बोर्डों पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। अस्पताल और फार्मेसी को इन पाबंदियों से छूट दी गई है।
बांग्लादेश के मौजूदा ऊर्जा संकट की बड़ी वजह प्राकृतिक गैस और ईंधन की कमी बताई जा रही है। देश बिजली उत्पादन के लिए आयातित ईंधन पर काफी निर्भर है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, बांग्लादेश अपनी 90 फीसदी से ज्यादा तेल जरूरत आयात से पूरी करता है, जबकि गैस की करीब 30 फीसदी जरूरत भी विदेशों से आती है।
हालिया घटनाओं ने मुश्किल और बढ़ा दी। अमेरिका की कंपनी एक्सेलरेट एनर्जी के एलएनजी टर्मिनल में 21 जुलाई को आग लगने के बाद एलएनजी आपूर्ति प्रभावित हुई। इसके अलावा खराब समुद्री मौसम के कारण दो एलएनजी जहाजों से भी समय पर माल नहीं उतारा जा सका। गैस की कमी का सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ा और करीब 1,500 मेगावाट उत्पादन क्षमता प्रभावित होने की बात सामने आई है।
राजधानी ढाका में बिजली आपूर्ति काफी हद तक सामान्य बताई जा रही है, लेकिन शहर के बाहर हालात गंभीर हैं। मैमनसिंह, बरिसाल, रंगपुर और सिलहट जैसे क्षेत्रों में बिजली कटौती से लोग परेशान हैं।
राजशाही और खुलना में भी स्थिति खराब बताई जा रही है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में रोजाना तीन से पांच घंटे की लोड शेडिंग हो रही है, जबकि खुलना के कुछ इलाकों में 10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायतें सामने आई हैं।
लंबे ब्लैकआउट से छोटे कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं। कारोबारियों को काम चलाने के लिए वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों पर खर्च करना पड़ रहा है, जिससे लागत बढ़ रही है।
लगातार बिजली कटौती से लोगों का गुस्सा अब सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ इलाकों में नाराज लोगों ने बिजली केंद्रों पर हमले और तोड़फोड़ की। हालात को देखते हुए बांग्लादेश पल्ली बिद्युत एसोसिएशन ने बिजली केंद्रों और सबस्टेशनों की सुरक्षा के लिए पुलिस से मदद मांगी है।
सैयदपुर, नील्फामारी और कुश्तिया में भी तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं की जानकारी सामने आई है। अब बिजली कार्यालयों की ओर से रात में गश्त बढ़ाने और सुरक्षा बल तैनात करने की मांग की जा रही है।
ऊर्जा संकट का असर बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर पड़ रहा है। किसान सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए महंगे डीजल जनरेटर का सहारा लेने को मजबूर हैं। इससे खेती की लागत बढ़ रही है।
झींगा पालन करने वाले किसानों की परेशानी और गंभीर है। तालाबों में ऑक्सीजन का स्तर बनाए रखने के लिए एरेटर लगातार चलाने पड़ते हैं। बिजली कटने पर एरेटर बंद हो जाते हैं और झींगों के मरने का खतरा बढ़ जाता है। बांग्लादेश दुनिया के प्रमुख झींगा निर्यातकों में शामिल है।
दूसरी तरफ, टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग भी बिजली संकट की मार झेल रहा है। फैक्ट्रियों में उत्पादन प्रभावित होने से देश के निर्यात और रोजगार पर दबाव बढ़ने की आशंका है।
ऊर्जा बचाने के लिए सरकार ने संरक्षण उपायों को सख्त कर दिया है। दुकानों और शॉपिंग मॉल को रात 8 बजे तक बंद करने का निर्देश दिया गया है। ट्रेड फेयर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को भी इसी समय सीमा में समाप्त करने को कहा गया है।
इसके अलावा सजावटी लाइटों के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई है और रात 7 बजे तक रोशन विज्ञापन बोर्ड बंद करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि अस्पतालों और फार्मेसियों को इन प्रतिबंधों से छूट दी गई है।
ऊर्जा संकट से तत्काल राहत के लिए बांग्लादेश ने अब भारत से अतिरिक्त डीजल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। यह मांग भारतीय उच्चायुक्त के साथ हुई बैठक के दौरान रखे जाने की बात सामने आई है।
बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्री इकबाल हसन महमूद के मुताबिक, दोनों देशों के बीच पहले से ही एक पाइपलाइन है, जिसके जरिए डीजल की आपूर्ति होती है। बांग्लादेश ने भारत से इस माध्यम से अतिरिक्त डीजल देने का आग्रह किया है।
भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन 2017 से संचालित है और दोनों देशों के बीच पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति का अहम माध्यम है। इससे पहले मार्च और अप्रैल में भी क्षेत्रीय ऊर्जा संकट के दौरान भारत की ओर से बांग्लादेश को 30 हजार टन से अधिक डीजल भेजे जाने की बात सामने आई थी।
भारत से अतिरिक्त ईंधन की मांग ऐसे समय हुई है जब दोनों देशों के संबंधों में राजनीतिक तनाव बना हुआ है। 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के बांग्लादेश छोड़ने और भारत आने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में खटास बढ़ी।
इसके बावजूद मौजूदा ऊर्जा संकट ने दिखा दिया है कि बांग्लादेश के लिए भारत से ईंधन आपूर्ति कितनी महत्वपूर्ण है। तत्काल अतिरिक्त डीजल मिलने से संकट में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन लंबे समय के लिए बांग्लादेश के सामने आयातित गैस और ईंधन पर निर्भरता कम करने की बड़ी चुनौती बनी हुई है।
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