
नई दिल्ली: भारत और यूरोपीय संघ (India and the European Union) में डील का ऐलान हो चुका है. 27 जनवरी को अधिकारिक तौर पर दोनों देशों के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर मोहर लग गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने कहा कि आखिरकार ऐतिहासिक व्यापार समझौता पूरा हो चुका है, जो दशकों से रुक-रुककर चल रही थी. दोनों देशों ने इस डील के तहत अपने मार्केट एक-दूसरे के लिए खोलने पर सहमत हुए हैं. दोनों के 90 फीसदी तक प्रोडक्ट्स पर टैरिफ कम या समाप्त कर दिया जाएगा. इस कदम से भारत में भी आने वाले यूरोपीय प्रोडक्ट्स सस्ते हो जाएंगे. साथ ही भारत का एक्सपोर्ट यूरोप में बढ़ेगा. आइए जानते हैं भारत-ईयू के बीच इस डील से क्या-क्या फायदे होंगे.
भारत का एक्सपोर्ट बढ़ेगा
इस डील के बाद भारत और यूरोपीय संघ के एक्सपोर्ट में तेजी से इजाफा होगा. इससे टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, चमड़ा, ज्वेलरी, फार्मा, इंजीनियरिंग गुड्स टैरिफ कम होगा, जिससे इसका मार्केट यूरोप में तेजी से बढ़ जाएगा. अनुमान है कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत के एक्सपोर्ट में 2031 तक 50 अरब डॉलर का इजाफा होगा.
भारत को 500 मिलियन यूरो
इस समझौते में अगले दो सालों में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम करने और ग्रीन ट्रांजिशन को तेज करने में भारत की मदद के लिए EU की तरफ से 500 मिलियन यूरो की मदद भी शामिल है. यह भारत के ग्रीनहाउस सेक्टर के लिए एक बड़ी मदद मिलेगी.
यूरोप में भारतीय प्रोडक्ट्स की धमक
फ्री ट्रेड डील के बाद यूरोप में भारत के पोडक्ट्स सस्ते दामों पर मिलने शुरू हो जाएंगे, जिससे चीन, बांग्लादेश, वियतनाम जैसे देशों को कड़ी टक्कर मिलेगी. भारत ज्यादा से ज्यादा पोडक्ट्स भी यूरोप में सप्लाई करेगा.
भारत में बढ़ेगा निवेश
इस कदम के तहत भारत में बड़े लेवल पर यूरोपीय निवेश आएगा. जर्मनी, फ्रांस, इटली जैसी कंपनियां भारत में अपने निवेश को बढ़ा सकती हैं, जिससे मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन एनर्जी, ऑटो, सेमीकंडक्टर सेक्टर में भारत को एक बड़ी उपलब्धि हासिल हो सकती है. ऐसे में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे, अनुमान के मुताबिक, डायरेक्ट एंड इनडायरेक्ट लाखों नौकरियों के अवसर मिलेंगे. जिस कारण भारत के Make in India मिशन को सपोर्ट मिलेगा.
सर्विस सेक्टर को फायदा
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत IT, सॉफ्टवेयर, फिनटेक, प्रोफेशनल सर्विसेज की भारतीय मार्केट में असानी से एंट्री होगी. साथ ही इस सेक्टर में भी निवेश के नए मौके बनेंगे. लॉन्ग टर्म में रणनीतिक और आर्थिक मजबूती भी बढ़ेगी.
मशीनरी, रसायन और फार्मास्यूटिकल्स पर फोकस
यूरोपीय संघ ने कहा कि मशीनरी पर 44% तक, रसायनों पर 22% तक और फार्मास्यूटिकल्स पर 11% तक के शुल्क को काफी हद तक समाप्त कर दिया जाएगा. दवाओं के दाम इससे सस्ते होंगे, कम दाम पर मेडिकल और अन्य मशीनरी प्रोडक्ट्स सस्ते होंगे. इससे इंडस्ट्रियल मजबूती बढ़ेगी.
कारो पर टैक्स घटकर 10 फीसदी
भारतीय उपभोक्ताओं और ऑटो उद्योग के लिए, इस घोषणा का सबसे ध्यान खींचने वाला हिस्सा कार शुल्क में कमी है. यूरोपीय संघ का कहना है कि कारों पर टैरिफ धीरे-धीरे घटकर 10% हो जाएगा, जिसके लिए साल 2,50,000 वाहनों का कोटा तय किया गया है. इसका मतलब यह है कि समझौते के तहत सालाना आयात किए जाने वाले पहले 2,50,000 वाहन ही कम टैरिफ के लाभ के पात्र होंगे.
क्या क्या होंगे सस्ते
यूरोपीय संघ के 90 फीसदी तक के उत्पाद पर टैरिफ कम किया गया है, जिसका मतलब है कि ये उत्पाद सस्ते होंगे.
शराब, बीयर, वाइन
EU वाइन पर टैक्स घटकर 20–30%
EU स्पिरिट्स पर टैक्स 40%
EU बीयर पर टैक्स 50%
खाने-पीने की चीज़ें
ऑलिव ऑयल, मार्जरीन, वेजिटेबल ऑयल पर टैरिफ पूरी तरह खत्म
गाड़ियां (Cars)
टैक्स धीरे-धीरे घटकर 10%
सालाना 2.5 लाख कारों की सीमा
मेडिकल और सर्जिकल इक्विपमेंट
90% प्रोडक्ट्स पर टैक्स खत्म
इलाज और जांच से जुड़ी मशीनें सस्ती
सेवाएं (Services)
EU की फाइनेंशियल और मैरीटाइम कंपनियों को भारत में आसान एंट्री
बैंकिंग, शिपिंग जैसी सेवाएं सस्ती/आसान हो सकती हैं.
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