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सैटेलाइट इमेजरी ने खोली चीन की पोल, विवादित क्षेत्र में करा रहा पक्का निर्माण कार्य

January 07, 2026

नई दिल्‍ली। अमेरिका से व्यापारिक तनातनी के बीच भले ही पूर्वी पड़ोसी देश चीन (China) फिर से भारत के नजदीक आया हो लेकिन उसकी कारस्तानी जारी है। नई हाई-रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी (Satellite imagery)  से पता चला है कि चीन पूर्वी लद्दाख के विवादित पैंगोंग त्सो झील (The disputed Pangong Tso lake) के इलाके में अपनी स्थायी सैन्य मौजूदगी को लगातार मजबूत कर रहा है और उस इलाके में पक्का निर्माण कार्य करवा रहा है। हालिया सैटेलाइट इमेजरी के हवाले से एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पैंगोंग झील के बिल्कुल पास नए स्थायी सैन्य ढांचों का निर्माण कराया जा रहा है, जो तस्वीरों में साफ-साफ दिखाई देता है।


  • जिस जगह पक्का निर्माण कराया जा रहा है, वह इलाका सिरिजाप पोस्ट के करीब है, जिस पर चीन का नियंत्रण 1962 के युद्ध के बाद से ही है। हालांकि भारत इसे आज भी अपने क्षेत्र का हिस्सा मानता है। इमेजरी में साफ दिख रहा है कि नई पक्की इमारतें झील से कुछ ही मीटर की दूरी पर बनाई जा रही हैं, जिससे चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को मौजूदा बफर ज़ोन के बेहद करीब अधिक संसाधन तैनात करने में मदद मिल सकती है।

    2013 से मौजूद है सड़क नेटवर्क
    बता दें कि चीन ने इस इलाके में 2013 में सड़क नेटवर्क का विकास किया था, जिसका इस्तेमाल पहले भारत और चीन दोनों की सेनाएं गश्त के लिए करती थीं लेकिन मई 2020 में हुए सैन्य झड़प के बाद से भारतीय गश्ती दल को यहां जाने की इजाजत नहीं है। यहां यह बात गौर करने वाली है कि 2020 के झड़प के बाद से यहां सैनिकों के लिए अस्थायी ढांचे, नावें और झील पार करने के लिए एक घाट (पियर) का इस्तेमाल किया जा रहा था लेकिन स्पेस इंटेलिजेंस फर्म ‘Vantor’ द्वारा जारी 28 दिसंबर, 2025 की सैटेलाइट तस्वीरों में वहां अस्थायी कैंप के साथ-साथ नए निर्माण स्थल भी साफ देखे जा सकते हैं।

    सर्दियों को देखते हुए तैयारियां

    माना जा रहा है कि सर्दियों को देखते हुए ये तैयारियां चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) द्वारा की गई हैं। पिछले साल 2 जून की तस्वीरों में जो नावें झील में दिखाई दे रही थीं, वे अब ढकी हुई और पानी से दूर खड़ी नजर आ रही हैं। माना जा रहा है कि यह सर्दियों में झील के जमने को ध्यान में रखते हुए किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, 2025 के दूसरे हिस्से में निर्माण की रफ्तार तेज़ हुई है और दिसंबर की तस्वीरों में कई पक्की इमारतें स्पष्ट रूप से दिखती हैं।

    रिश्तों में नरमी, लेकिन सवाल बरकरार

    बीते एक साल में भारत-चीन संबंधों में कुछ सुधार देखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात साल बाद चीन का दौरा कर शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इसके अलावा दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू हुईं। पूर्वी लद्दाख के सभी टकराव बिंदुओं से दोनों पक्षों के “डिसएंगेजमेंट” (तनाव में कमी) की बात कही गई है, लेकिन हालिया इमेजरी से जो बातें और संकेत निकल कर आ रहे हैं, उनसे चीन के इरादों को लेकर संदेह अब भी बना हुआ है।
    भारत की स्थिति कमजोर हो रही

    द इंटेल लैब के जियोस्पेशियल रिसर्चर डेमियन साइमोन ने कहा, “पैंगोंग झील के पास चीन का यह निर्माण कार्य उसकी उस रणनीति का हिस्सा है, जिसमें वह स्थायी ढांचे बनाकर मौजूदगी को नियंत्रण में बदल देता है। यह परियोजना 2020 के डिसएंगेजमेंट ज़ोन से बाहर है और सालभर सैन्य संचालन की उसकी क्षमता को मजबूत करती है।” उन्होंने कहा कि भले ही यह इलाका फिलहाल चीन के नियंत्रण में हो, लेकिन यह भारत द्वारा दावा किए गए विवादित क्षेत्र में आता है और इस तरह का निर्माण भारत की स्थिति को कमजोर करता है।

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