नई दिल्ली। 21वीं सदी के युद्ध परिदृश्य (War Scenario) में सैन्य ताकत का आकलन अब केवल जमीनी सेना (Ground forces) से नहीं, बल्कि वायुसेना और नौसेना की तकनीकी क्षमता से किया जाता है। यही कारण है कि दुनिया भर के देश अत्याधुनिक फाइटर जेट, एयरक्राफ्ट कैरियर, पनडुब्बियों (State-of-the-art fighter jets, aircraft carriers, submarines) और लंबी दूरी की मिसाइलों पर तेजी से निवेश कर रहे हैं। भारत भी इसी दिशा में अपनी सैन्य ताकत को आधुनिक बनाने की रणनीति पर काम कर रहा है।
इजरायली तकनीक से मिलेगी स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक क्षमता
रिपोर्टों के अनुसार, भारत ने लंबी दूरी की अत्याधुनिक क्रूज मिसाइल हासिल करने की दिशा में इज़रायल के साथ समझौता किया है। यह मिसाइल इजरायल की रक्षा कंपनी Rafael Advanced Defense Systems द्वारा विकसित की गई है और इसे आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रणाली भारतीय वायुसेना को सुरक्षित दूरी से दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने की क्षमता देगी। इस तरह के हमलों को “स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक” कहा जाता है, जिसमें लड़ाकू विमान दुश्मन की सीमा में प्रवेश किए बिना लक्ष्य को नष्ट कर सकते हैं।
आधुनिक युद्ध में A2/AD चुनौती से निपटने की तैयारी
आज की सबसे बड़ी सैन्य चुनौती दुश्मन के A2/AD (Anti-Access/Area Denial) नेटवर्क को पार करना है। यह बहुस्तरीय एयर डिफेंस सिस्टम ऐसे क्षेत्र बना देते हैं, जहां पारंपरिक हथियारों या विमानों का प्रवेश बेहद जोखिम भरा होता है।
नई पीढ़ी की क्रूज मिसाइल को खासतौर पर इसी तरह की सुरक्षा को चकमा देने के लिए तैयार किया गया है। इसकी प्रमुख विशेषताएं—
जमीन के बेहद करीब उड़ान भरने की क्षमता, जिससे रडार से बचाव
स्टील्थ डिजाइन, जिससे पहचान मुश्किल
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नेविगेशन
अंतिम क्षणों में लक्ष्य पर सटीक प्रहार
पायलट और विमान को जोखिम से दूर रखते हुए हमला
इन क्षमताओं के कारण यह आधुनिक एयर डिफेंस नेटवर्क के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
वैश्विक रक्षा सहयोग से मजबूत हो रही भारत की रणनीति
भारत लंबे समय से बहुस्तरीय रक्षा सहयोग नीति पर काम कर रहा है और फ्रांस, रूस, जर्मनी और इज़रायल जैसे देशों के साथ तकनीकी साझेदारी बढ़ा रहा है। इसका उद्देश्य केवल हथियार खरीदना नहीं, बल्कि भविष्य की नेटवर्क-सेंट्रिक और हाई-प्रिसिजन वॉरफेयर क्षमता विकसित करना है।
रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह की लंबी दूरी की स्मार्ट मिसाइलें भारत को संभावित संघर्ष क्षेत्रों में बढ़त दे सकती हैं, खासकर उन परिस्थितियों में जहां अत्याधुनिक एयर डिफेंस मौजूद हो, जैसे कि चीन के रक्षा नेटवर्क।
वायु युद्ध रणनीति में बदलाव का संकेत
नई तकनीकों का समावेश यह दर्शाता है कि भारत पारंपरिक युद्ध मॉडल से आगे बढ़कर “हाई-टेक, प्रिसिजन-ड्रिवन” युद्ध सिद्धांत की ओर बढ़ रहा है।
इसमें—
दूर से सटीक प्रहार
कम समय में मिशन पूरा करना
मानव जोखिम घटाना
नेटवर्क आधारित ऑपरेशन
मल्टी-डोमेन वॉरफेयर (एयर-सी-साइबर समन्वय)
जैसी अवधारणाएं केंद्र में हैं।
भारत का यह रक्षा आधुनिकीकरण केवल हथियारों की संख्या बढ़ाने का प्रयास नहीं, बल्कि भविष्य के तकनीकी युद्ध के लिए सामरिक बदलाव का संकेत है—जहां गति, सटीकता और अदृश्यता ही असली ताकत मानी जाएगी।
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