
काहिरा. चीन के राष्ट्रपति (Chinese President) शी जिनपिंग (Xi Jinping) इस सप्ताह मिस्र (Egypt) के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। यह यात्रा चीन और मिस्र के बीच आर्थिक एवं राजनयिक संबंधों को मजबूत करने की सामान्य कवायद नजर आती है, लेकिन इसके पीछे पश्चिम एशिया में चीन के बढ़ते प्रभाव की बड़ी रणनीति भी देखी जा रही है।
अमेरिका के प्रमुख वैश्विक प्रतिद्वंद्वी चीन के लिए मिस्र पश्चिम एशिया में अपनी मौजूदगी मजबूत करने का अहम केंद्र बनता जा रहा है। वहीं, मिस्र अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी है। ऐसे में शी की काहिरा यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों से आगे क्षेत्रीय भू-राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मिस्र पहुंचे शी जिनपिंग, हुआ भव्य स्वागत
शी जिनपिंग मंगलवार शाम काहिरा एयरपोर्ट पहुंचे। उनके स्वागत के लिए एयरपोर्ट को चीन और मिस्र के झंडों से सजाया गया था। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी और सैन्य गार्डों ने रेड कार्पेट समारोह के साथ उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बुधवार को बातचीत करने का कार्यक्रम है। शी जिनपिंग ग्रैंड इजिप्शियन म्यूजियम का भी दौरा करेंगे, जो गीजा के पिरामिडों के पास स्थित है। यह मिस्र की उनकी करीब एक दशक बाद पहली यात्रा है। वहीं, 2022 में सऊदी अरब दौरे के बाद यह पश्चिम एशिया की उनकी पहली यात्रा है।
चीन-मिस्र के रिश्तों में क्यों आई तेजी?
चीन और मिस्र इस साल अपने राजनयिक संबंधों की स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर रहे हैं। इसी मौके पर दोनों देशों के नेताओं ने मंगलवार को मिस्र के सरकारी अखबारों में दोस्ताना लेख भी प्रकाशित किए। शी जिनपिंग ने दोनों देशों से विकास के जरिए व्यावहारिक सहयोग का दायरा बढ़ाने की अपील की। वहीं, अल-सीसी ने मिस्र में चीन के निवेश की सराहना की और ताइवान को चीन का हिस्सा मानने वाले बीजिंग के दावे के समर्थन को दोहराया। मिस्र चीन के साथ बढ़ते रिश्तों को अपनी रणनीतिक साझेदारियों में विविधता लाने के अवसर के तौर पर देखता है।
ब्रिक्स से बेल्ट एंड रोड तक चीन की बढ़ती पकड़
मिस्र को 2023 में ब्रिक्स में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया था। यह समूह उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रमुख मंच है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देश शामिल हैं। इसके एक साल बाद मिस्र और चीन ने चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत सहयोग के लिए समझौतों पर हस्ताक्षर किए। यह पहल दुनियाभर में बुनियादी ढांचे और परिवहन नेटवर्क के निर्माण के जरिए चीन की आर्थिक और रणनीतिक पहुंच बढ़ाने पर केंद्रित है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चीन मिस्र में 10 अरब डॉलर से अधिक का निवेश कर चुका है। इनमें काहिरा के पूर्व में बिजनेस हब और नील डेल्टा में औद्योगिक क्षेत्र के लिए इलेक्ट्रिक रेल लाइन जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार करीब 20 अरब डॉलर का बताया जाता है। इसके मुकाबले 2025 में अमेरिका और मिस्र के बीच व्यापार 15.7 अरब डॉलर रहा था।
पश्चिम एशिया में अमेरिका को चुनौती देने की कोशिश?
चीन लंबे समय से पश्चिम एशिया में अपनी कूटनीतिक और आर्थिक भूमिका बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। 2023 में बीजिंग ने ईरान और सऊदी अरब के बीच राजनयिक संबंध बहाल कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। यह कदम पश्चिम एशिया में अमेरिका के प्रभाव को चुनौती देने की चीन की महत्वाकांक्षा का महत्वपूर्ण उदाहरण माना गया। हालांकि, इसके बाद से तेहरान और रियाद के रिश्तों में फिर तनाव देखने को मिला है। चीन खुद को क्षेत्र में एक मध्यस्थ और स्थिरता कायम करने वाली ताकत के रूप में पेश करता रहा है। इजरायल-फिलिस्तीन विवाद पर भी बीजिंग लंबे समय से दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन करता है।
स्वेज नहर पर चीन की नजर क्यों?
ईरान युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आवाजाही प्रभावित होने के बीच मिस्र की स्वेज नहर ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग बन गई है। पश्चिम एशिया और यूरोप के बीच समुद्री व्यापार के लिए स्वेज नहर की अहमियत को देखते हुए चीन के लिए मिस्र के साथ रिश्ते मजबूत करना रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, मिस्र चीन के लिए व्यापक अरब और अफ्रीकी क्षेत्र तक अपनी पहुंच बढ़ाने का आधार भी बन सकता है।
चीन और मिस्र के बीच सैन्य सहयोग भी बढ़ा
आर्थिक और कूटनीतिक संबंधों के साथ दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग भी मजबूत हुआ है। अगस्त में चीन और मिस्र ने मिस्र के कई सैन्य ठिकानों पर बहुदिवसीय हवाई अभ्यास किया था। यह पहली बार था जब चीन के J-16 लड़ाकू विमानों और मिस्र के फ्रांस निर्मित राफेल लड़ाकू विमानों ने संयुक्त युद्धाभ्यास में हिस्सा लिया।
एससीओ बैठक के बाद मिस्र पहुंचे शी
शी जिनपिंग की मिस्र यात्रा ऐसे समय हो रही है जब वह किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन की दो दिवसीय बैठक में हिस्सा लेने के बाद काहिरा पहुंचे हैं। एससीओ को वैश्विक स्तर पर अमेरिकी प्रभाव के मुकाबले एक महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं सुरक्षा समूह के रूप में देखा जाता है। बिश्केक बैठक में रूस, भारत, पाकिस्तान और ईरान के नेता भी शामिल हुए थे।
शी का मिस्र दौरा ईरान पर ट्रंप प्रशासन के बढ़ते आर्थिक दबाव के बीच भी हो रहा है। अमेरिका की ओर से ईरान के वित्तीय संबंधों को सीमित करने के लिए प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। चीन ईरान का एक प्रमुख तेल खरीदार है और उसके तेल आयात में बड़ी हिस्सेदारी रखता है। बीजिंग का कहना है कि ईरान के साथ उसका व्यापार हमेशा अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप रहा है।
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