
नई दिल्ली: पब्लिक सेक्टर की कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड इस महीने ऑनलाइन नीलामी के जरिए 2.56 करोड़ टन कोयले की पेशकश करने की योजना बना रही है. कोल इंडिया के इस कदम से पश्चिम एशिया संकट के बीच उद्योग को ऊर्जा आपूर्ति के झटकों को कम करने में मदद मिलेगी. पश्चिम से एलएनजी, एलपीजी और कच्चे तेल की आपूर्ति में आए व्यवधान की वजह से कोयले की मांग बढ़ गई है. साथ ही आयातित कोयला भी महंगा हो गया है.
कोल इंडिया ने इस साल फरवरी में 2.05 करोड़ टन के मुकाबले मार्च में ई-नीलामी के जरिए 3.25 करोड़ टन कोयले की पेशकश की थी. देश की प्रमुख कोयला उत्पादक कंपनी सिंगल विंडो के माध्यम से एग्नोस्टिक नीलामी से कोयले की पेशकश करती है. एसडब्ल्यूएमए नीलामी एक इंटीग्रेटिड और सरलीकृत नीलामी प्रक्रिया है, जो 2022 में शुरू की गई थी. इसका मकसद कई मौजूदा नीलामी के तरीकों (हाजिर, विशेष हाजिर, फॉरवर्ड) को एक ही प्लेटफॉर्म पर लाना है, जिससे सभी खरीदारों के लिए कोयला खरीदना आसान, ज्यादा ट्रांसपेरेंसी और बाजार आधारित हो गया है.
कोल इंडिया लिमिटेड के एसडब्ल्यूएमए नीलामी कैलेंडर के मुताबिक, कोल इंडिया की अनुषंगी वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड 20 लाख टन, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड 30 लाख टन, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड 32 लाख टन, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड छह लाख टन, भारत कोकिंग कोल लिमिटेड 38 लाख टन, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड 47 लाख, महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड 85 लाख टन और नॉर्थ ईस्टर्न कोलफील्ड 20 हजार टन कोयले की पेशकश करने की योजना बना रही हैं.
देश के कुल कोयला उत्पादन में कोल इंडिया की हिस्सेदारी 80 प्रतिशत है. कोल इंडिया ने कहा है कि बांग्लादेश, भूटान और नेपाल के खरीदार अब ऑनलाइन कोयला नीलामी में सीधे शामिल हो सकते है. उन्हें बिचौलियों के पास जाने की जरूरत नहीं है. कंपनी ने कहा है कि इस कदम से अधिशेष कोयला संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा और पारदर्शिता बढ़ेगी.
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