
नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट(Middle East) के रेगिस्तानी इलाकों(Desert regions) में जब पहली बार क्रूड ऑयल(crude oil) के भंडार खोजे गए, तब वहां रहने वाले लोगों की जीवनशैली में अभूतपूर्व बदलाव आया। यह तेल केवल आर्थिक संपदा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की ऊर्जा की रीढ़ बन गया। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान(Iran) पर हालिया हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में खलबली मची हुई है। 28 फरवरी को हुए हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत की खबर के बाद ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर पलटवार शुरू कर दिया। इस संघर्ष का असर धीरे-धीरे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग रूट्स पर भी देखने को मिल रहा है।
जब तेल के भंडार खोजे गए, तब गल्फ देशों में जीवन बेहद कठिन था। लेकिन तेल के आविष्कार के बाद वहां आर्थिक समृद्धि आई। अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों ने जल्दी ही इस संपदा पर नजर डाल दी। 1973 में हुए ‘अक्तूबर युद्ध’ के समय ब्रिटेन के सरकारी दस्तावेज़ बताते हैं कि अमेरिका ने मिडिल ईस्ट के तेल भंडारों पर कब्जा करने की योजना बनाई थी। अरब देशों ने इजरायल के खिलाफ युद्ध के बाद तेल बिक्री पर रोक लगा दी थी। इसके चलते अमेरिका ने सऊदी अरब, कुवैत और अबूधाबी में एयरफोर्स सहायता के जरिए तेल संसाधनों पर नियंत्रण पाने की रणनीति बनानी शुरू कर दी।
ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों को अमेरिकी रणनीति की भनक लगी थी। तत्कालीन अमेरिकी रक्षा मंत्री जेम्स शेल्सिंगर ने ब्रिटिश एंबेस्डर को चेतावनी दी थी कि तेल पर कब्जा करने के लिए अमेरिका बलप्रयोग से भी नहीं झिझकेगा। ब्रिटेन की संयुक्त जांच समिति ने अनुमान लगाया कि अमेरिका के इस अभियान में दो ब्रिगेड की जरूरत होगी-एक सऊदी अरब के लिए, दूसरी कुवैत और तीसरी अबूधाबी के लिए। इसका मकसद आने वाले 10 सालों तक तेल भंडारों पर नियंत्रण बनाए रखना था।
हालांकि अमेरिका ने बलप्रयोग का विकल्प पूरी तरह लागू नहीं किया और पश्चिमी देशों के दबाव और समझौतों के चलते खाड़ी देशों ने तेल पर पाबंदी हटा दी। लेकिन तब तक अमेरिका की नजर गल्फ देशों के तेल भंडारों पर गड़ चुकी थी।
इतिहास में तेल की अहमियत पहली बार प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) में पूरी दुनिया ने समझी। युद्ध में टैंकों, ट्रकों, युद्धक जहाजों और नौसेना के लिए तेल की आवश्यकता स्पष्ट हुई। जिन देशों ने तेल का सही इस्तेमाल किया, वे विजेता बने। यह अनुभव पश्चिमी देशों की रणनीति में शामिल हुआ और आगे चलकर अमेरिका ने अपने सामरिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए मिडिल ईस्ट में हस्तक्षेप शुरू किया।
आज भी क्रूड ऑयल मिडिल ईस्ट की सबसे बड़ी संपदा है और अमेरिका की रणनीति ने यह स्पष्ट कर दिया कि तेल के भंडार केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति और सामरिक ताकत का केंद्र हैं। इस संपदा ने गल्फ देशों की किस्मत बदल दी और वैश्विक ऊर्जा राजनीति में उन्हें अहम खिलाड़ी बना दिया।
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