नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से जुड़े करीब 500 करोड़ रुपये के बड़े कारोबारी विवाद को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अहम कदम उठाया है। अदालत ने इस मामले में पूर्व प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित (UU Lalit) को मध्यस्थ नियुक्त किया है।
यह विवाद रास अल खैमाह इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (RAKIA) और हैदराबाद के उद्योगपति निम्मगड्डा प्रसाद के बीच है, जिसमें UAE की अदालत पहले ही RAKIA के पक्ष में फैसला दे चुकी है।
क्या है पूरा मामला?
RAKIA एक विदेशी दीवानी फैसले को भारत में लागू कराना चाहती है। इस फैसले के तहत प्रसाद को करीब 267 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (लगभग 543 करोड़ रुपये, ब्याज सहित करीब 643 करोड़ रुपये) चुकाने हैं।
यह विवाद 2008 में शुरू हुए ‘वैनपिक प्रोजेक्ट’ से जुड़ा है, जो आंध्र प्रदेश में बंदरगाह और हवाई अड्डे के विकास के लिए प्रस्तावित एक संयुक्त उपक्रम था, लेकिन बाद में विफल हो गया।
गबन के आरोप
RAKIA का आरोप है कि परियोजना के लिए आवंटित 12 करोड़ डॉलर की राशि का गबन किया गया। इसमें कंपनी के पूर्व सीईओ खाटर मस्साद के साथ मिलकर धन के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सुनवाई के दौरान प्रसाद की ओर से वरिष्ठ वकील गोपाल सुब्रमण्यम ने बताया कि—
125 करोड़ रुपये नकद अदालत में जमा कर दिए गए हैं
तेलंगाना स्थित 37 एकड़ जमीन के मूल दस्तावेज भी सौंप दिए गए हैं
संबंधित संपत्ति किसी भी कानूनी देनदारी से मुक्त है
उन्होंने यह भी कहा कि उनका मुवक्किल मामले के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए मध्यस्थता को तैयार है।
दोनों पक्ष मध्यस्थता पर राजी
RAKIA की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी और गोपाल शंकरनारायणन ने भी समयबद्ध मध्यस्थता पर सहमति जताई। हालांकि उन्होंने शर्त रखी कि विवादित संपत्तियों की स्थिति यथावत रखी जाए और प्रक्रिया पूरी होने तक किसी तीसरे पक्ष को शामिल न किया जाए।
हाइब्रिड मोड में होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों को देखते हुए मध्यस्थता ‘हाइब्रिड मोड’ (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग + फिजिकल) में की जाएगी, ताकि UAE के प्रतिनिधि भी आसानी से शामिल हो सकें।
अब इस हाई-प्रोफाइल विवाद के जल्द समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।
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