
नई दिल्ली । दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने लालू प्रसाद यादव की याचिका पर (On Lalu Prasad Yadav’s Petition) सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांगा (Issued Notice to CBI seeking Response) ।
इस याचिका में लालू ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कथित आईआरसीटीसी होटल घोटाला मामले में उनके और उनके परिवार के सदस्यों के खिलाफ आपराधिक आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था। मामले की सुनवाई के बाद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की सिंगल-जज बेंच ने केंद्रीय एजेंसी से जवाब मांगा और लालू प्रसाद यादव द्वारा दायर आपराधिक रिवीजन याचिका के साथ-साथ स्टे एप्लीकेशन पर भी नोटिस जारी किया।
जस्टिस शर्मा ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जनवरी की तारीख तय की है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख ने राऊज एवेन्यू कोर्ट द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी है, जिसमें आईआरसीटीसी घोटाले के संबंध में भ्रष्टाचार, आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी से संबंधित अपराधों के लिए उनके और अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त आधार पाए गए थे।
दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (पीसी एक्ट) विशाल गोगने ने 13 अक्टूबर 2025 को पारित एक आदेश में लालू प्रसाद यादव, उनके बेटे तेजस्वी यादव, उनकी पत्नी राबड़ी देवी और अन्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 420 (धोखाधड़ी) और 120बी (आपराधिक साजिश) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ट्रायल का रास्ता साफ कर दिया, जब उन्होंने आरोपों के लिए खुद को निर्दोष बताया।
विशेष अदालत ने 29 मई को लालू प्रसाद, उनके परिवार के सदस्यों, प्रेम गुप्ता, सरला गुप्ता और रेलवे अधिकारियों राकेश सक्सेना और पीके गोयल के खिलाफ आरोप तय करने पर विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। यह कथित घोटाला 2004 से 2009 के बीच हुआ था, जब लालू प्रसाद केंद्रीय रेल मंत्री थे। उनके कार्यकाल के दौरान, नियमों का पालन किए बिना दो होटलों को लीज पर दिया गया था।
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