
तेहरान. ईरान (Iran) में हालिया विरोध प्रदर्शनों (Protests) के बाद अब सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है, लेकिन सत्ता के गलियारों में गुस्सा और सख्ती बरकरार है। शुक्रवार को एक वरिष्ठ कट्टरपंथी मौलवी (radical cleric) ने न सिर्फ गिरफ्तार प्रदर्शनकारियों को फांसी देने की मांग की, बल्कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को भी खुली धमकी दी।
रिपोर्ट के मुताबिक, दिसंबर के अंत में शुरू हुए विरोध प्रदर्शन, जो पहले महंगाई और आर्थिक हालात को लेकर थे, धीरे-धीरे ईरान की धार्मिक सत्ता के खिलाफ खुली चुनौती में बदल गए। सरकार की कड़ी कार्रवाई के बाद अब तेहरान समेत देश के कई हिस्सों में जनजीवन सामान्य दिख रहा है, हालांकि इंटरनेट बंदी अब भी जारी है।
अब तक 3090 लोगों की मौत
अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी ने दावा किया है कि कार्रवाई में अब तक कम से कम 3,090 लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंकड़ा ईरान में दशकों में हुए किसी भी आंदोलन से कहीं ज्यादा बताया जा रहा है। हालांकि ईरानी सरकार ने अब तक आधिकारिक तौर पर मृतकों की संख्या जारी नहीं की है।
कट्टर मौलवी ने की सजा की चेतावनी
इस बीच, शुक्रवार की नमाज के दौरान कट्टर मौलवी आयतुल्लाह अहमद खातमी ने भड़काऊ भाषण दिया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को इस्राइल और अमेरिका का एजेंट बताया और कहा कि हथियार उठाने वालों को मौत की सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को भी कड़ी सजा की चेतावनी दी। दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने वॉशिंगटन में बयान देते हुए कहा कि ईरान ने सैकड़ों लोगों को फांसी न देकर सही कदम उठाया है। उन्होंने इसके लिए ईरानी नेतृत्व का आभार भी जताया, जिससे संकेत मिला कि अमेरिका फिलहाल सैन्य कार्रवाई से पीछे हट सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें भी तेज हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान और इस्राइल दोनों नेताओं से बातचीत की है। वहीं, कई खाड़ी देशों ने अमेरिका को चेताया है कि ईरान में सैन्य हस्तक्षेप से वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान हो सकता है। उधर, ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी ने आंदोलन जारी रखने की अपील की है और खुद ईरान लौटने का दावा किया है। हालांकि देश के भीतर उन्हें व्यापक समर्थन मिलता नहीं दिख रहा।
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