
जबलपुर। धर्मशास्त्र नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में गैर-शैक्षणिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यूनिवर्सिटी में पूर्व में हुई भर्तियों में अनियमितताओं और चहेतों को फायदा पहुँचाने का आरोप लगाया गया है। इस संबंध में उच्च स्तर पर शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसमें दावा किया गया है कि वर्ष 2021 में हुई भर्ती में मध्य प्रदेश शासन के नियमों की अनदेखी की गई है। यूनिवर्सिटी में एक बार फिर नए पदों के लिए भर्ती की तैयारी चल रही है, लेकिन पिछली भर्ती के विवादों ने आगामी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं।
2021 की भर्ती में नियमों को दरकिनार करने का आरोप
वर्ष 2021 में यूनिवर्सिटी द्वारा पर्सनल असिस्टेंट सहित अन्य पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था. शिकायतकर्ता का आरोप है कि तत्कालीन कुलसचिव जलज गोंटिया ने भर्ती नियमों को दरकिनार किया। लिपिकीय वर्ग के पदों के लिए मप्र शासन द्वारा निर्धारित अनिवार्य योग्यताएं, जैसे एक वर्षीय कंप्यूटर डिप्लोमा और सीपीसीटी (कम्प्यूटर प्रवीणता प्रमाणन परीक्षा), को विज्ञापन में शामिल ही नहीं किया गया। इस प्रकार, बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया से बाहर रखने और नियमों के विपरीत नियुक्तियां करने का आरोप है।
क्या है चयन प्रक्रिया और योग्यता
शिकायतकर्ता का दावा है कि चयनित अभ्यर्थियों के पास विज्ञापन की अंतिम तिथि तक आवश्यक शैक्षिक योग्यता नहीं थी. विज्ञापन में स्टेनोग्राफर के पदों के लिए स्टेनो परीक्षा का कोई उल्लेख नहीं था, और चयन केवल साक्षात्कार के आधार पर किया गया। आरोप है कि सीपीसीटी और कंप्यूटर डिप्लोमा के बिना ही कुछ व्यक्तियों को नियुक्त किया गया। इस चयन प्रक्रिया को पूरी तरह से संदेहास्पद बताया गया है, और इसमें चहेतों को अनुचित लाभ पहुँचाने का प्रयास किया जा रहा है।
वित्तीय अनियमितता पर भी प्रश्न
भर्ती प्रक्रिया में केवल योग्यता ही नहीं, बल्कि वेतनमान में भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगे हैं। मप्र शासन के संविदा नियम 2018 के अनुसार, संविदा कर्मचारियों को संबंधित पद के ग्रेड पे का 90 प्रतिशत वेतन दिया जाना चाहिए। शिकायत में उल्लेख है कि यूनिवर्सिटी द्वारा असिस्टेंट ग्रेड-तीन के पद पर चयनित कर्मचारियों को 27500 रुपये प्रति माह का भुगतान किया जा रहा है, जबकि नियमानुसार यह राशि लगभग 22700 रुपये होनी चाहिए थी। इससे यूनिवर्सिटी कोष को नुकसान पहुँचाने का दावा किया गया है।
कुलपति ने दी जांच की जिम्मेदारी
लॉ यूनिवर्सिटी में नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी चल रही है, लेकिन पिछली भर्ती के दौरान उपजे विवादों ने इसे भी संशय में डाल दिया है। इन आरोपों पर कुलपति प्रो. मनोज कुमार सिन्हा ने कहा कि नई भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और नियमों के अनुरूप बनाने के लिए शासन से परामर्श लिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि 2021 की भर्ती उनके कार्यकाल की नहीं है, लेकिन उन्होंने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए कुलसचिव से जांच कराने का आदेश दिया है। इधर शिकायतकर्ता ने इस मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
आयु सीमा और आरक्षण के नियमों की उपेक्षा
विज्ञापन में अभ्यर्थियों के लिए आयु सीमा का भी कोई जिक्र नहीं था. जबकि शासन के नियमानुसार, अनारक्षित वर्ग के लिए अधिकतम आयु 40 वर्ष और आरक्षित वर्ग के लिए 45 वर्ष निर्धारित है। इसके अतिरिक्त, संविदा कर्मचारियों के सेवा विस्तार में भी मनमानी का आरोप है। संविदा कर्मचारियों का नवीनीकरण हर साल होना चाहिए, लेकिन यूनिवर्सिटी में दो-दो साल तक सेवा विस्तार किया गया है। आरक्षण नियमों के पालन पर भी सवाल उठाए गए हैं. आरोप है कि भर्ती में आरक्षण का ध्यान नहीं रखा गया, और सभी पद सामान्य और पिछड़ा वर्ग से भर दिए गए, जबकि अनुसूचित जनजाति का एक भी पद नहीं भरा गया।
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