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तिरुपति में रोज होने वाली पहली आरती में शामिल हो सकेंगे कर्नाटक के गणमान्यजन – मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार

July 13, 2026


बेंगलुरु । मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार (Chief Minister D.K. Shivakumar) ने कहा कि तिरुपति में रोज होने वाली पहली आरती (First Daily Aarti at Tirupati) में कर्नाटक के गणमान्यजन शामिल हो सकेंगे (Dignitaries of Karnataka will be able to Attend) ।


  • कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार एक नया प्रोटोकॉल आदेश जारी करेगी, जिससे कर्नाटक के जनप्रतिनिधियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को तिरुपति में पहली आरती में शामिल होने की अनुमति मिल सकेगी। बनाशंकरी में श्री षणमुख सुब्रह्मण्य मंदिर की आधारशिला रखने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा, “तिरुपति में रोज होने वाली पहली आरती कर्नाटक से जुड़ी है। प्रोटोकॉल के अनुसार, राज्य सरकार एक आदेश जारी करेगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कर्नाटक के जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और अन्य गणमान्य व्यक्तियों को पहली आरती में शामिल होने की अनुमति मिले।” उन्होंने कहा, “अब तक यह विशेषाधिकार केवल राज्य के मुख्यमंत्री के पास था। रोजाना, कर्नाटक सरकार का एक विशेष अधिकारी तिरुपति में आरती में शामिल होता था। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे इस विशेषाधिकार को वहां जाने वाले किसी भी गणमान्य व्यक्ति तक बढ़ाने का आदेश जारी करें, चाहे वे मंत्री, विधायक, वरिष्ठ अधिकारी, न्यायाधीश या सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले कोई भी व्यक्ति हों।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “कई विधायक और जनप्रतिनिधि तिरुपति गए और बिना दर्शन किए ही लौट आए। अब उन्हें भगवान के सामने खड़े होने और आरती लेने का मौका दिया जाएगा। यह मौका इसलिए दिया गया है ताकि जो लोग इस राज्य की सेवा करते हैं, वे भगवान से प्रार्थना कर सकें। यह मेरे कार्यकाल की एक बड़ी घोषणा होगी।” उन्होंने कहा, “जब से मैं जेल से रिहा हुआ, हमारे कुलदेवता को तिरुपति नहीं ले जाया गया था। अपनी हालिया यात्रा के दौरान मैंने इस बारे में सोचा। एस. एम. कृष्णा ने तिरुपति में एक कर्नाटक ट्रस्ट बनाया था और एक भव्य ढांचा बनाने के इरादे से मुझे उसका चेयरमैन बनाया था लेकिन ऐसा होने से पहले ही हमारी सरकार का कार्यकाल खत्म हो गया। चूंकि मैं उस पद पर नहीं रहा, इसलिए वह काम पूरा नहीं हो सका। वहां सात एकड़ का एक प्लॉट था, जो महाराजाओं के जमाने में मिला था।”

    मुख्यमंत्री ने कहा, “द्वारकानाथ लंबे समय से सुब्रमण्य मंदिर बनाने की बात करते रहे हैं। मैंने उनसे कहा था कि सही मौका आएगा। अब वह मौका आ गया है। द्वारकानाथ मेरे लिए एक सम्मानित गुरु की तरह हैं। द्वारकानाथ ने एक बार एक भविष्यवाणी की थी। अगर मैं यहां उसका खुलासा करूं, तो वह बड़ी खबर बन जाएगी।” उन्होंने कहा, “गंगाधर अज्जैया ने कहा था कि मानवता का धर्म दिव्य होना चाहिए और दुनिया में शांति केवल धर्म से ही आती है। पूजा का तरीका चाहे कोई भी हो, भक्ति एक ही है। काम चाहे कोई भी हो, निष्ठा एक ही  है। ईश्वर एक है, लेकिन उसके कई नाम हैं।”

    डी.के शिवकुमार ने कहा, “सीवी शास्त्री ने मुझे द्वारकानाथ से मिलवाया था। जब मैं पैंतीस साल का था, तब से वे मेरा मार्गदर्शन कर रहे  हैं। अगर मैं उनके और मेरे बीच हुई सभी बातचीत और लेन-देन का जिक्र करूं, तो इतिहास की एक पूरी किताब भर जाएगी।” उन्होंने कहा, “द्वारकानाथ को भी आलोचना का सामना करना पड़ा है। यहां तक कि मीडिया ने भी उन पर सवाल उठाए हैं कि क्या वे डीके शिवकुमार की तरफ से बोल रहे हैं। पच्चीस सालों में उन्हें कई बार धमकियां मिली हैं। लेकिन वे कभी उन धमकियों से नहीं डरे।”

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