
नई भाजपा (BJP) , पुरानों का दमन…नयों को नमन… जो बल दिखाएगा, दावा जताएगा, खुद को सर्वोत्तम बताएगा, वो नरोत्तम बन जाएगा… खुद को मुख्यमंत्री (CM) पद का दावेदार बताने वाले, प्रदेश के गृहमंत्री बनकर ताकत दिखाने वाले… दतिया (Datia) की सीट को अपनी जागीर समझने वाले नरोत्तम मिश्रा (Narottam Mishra) अब न विधायक रहे और न रहेंगे, क्योंकि पार्टी ने नरोत्तम को उत्तम नहीं पाया…और नए-नवेले आशुतोष तिवारी पर विश्वास जताया…अब बौखलाए नरोत्तम हंगामा मचा रहे हैं…उत्पात बढ़ा रहे हैं…इस्तीफों के दौर चलाकर अपनी ताकत बता रहे हैं…दतिया को भाजपाविहीन करार देकर नेतृत्व को डरा रहे हैं…नरोत्तम समझ ही नहीं पा रहे हैं कि यह अटल-आडवानी की पार्टी नहीं है…यह मोदी-शाह की विरासत है…उन्हें चौंकाने में…दावेदारों को घर बैठाने में…चमकते चेहरों की चमक मिटाने में…ताकतवरों की ताकत मिटाने में और जुर्रत करने वालों की फजीहत कराने में बड़ा मजा आता है…वो सिक्का उछालते हैं… सिक्के के दोनों ओर वो ही नजर आते हैं और टकटकी लगाने वाले धोखा खा जाते हैं…वो जिसे चाहे बनाते हैं और जिसे चाहे मिटाते हैं…उनका फैसला यदि गलत हो जाए तो फैसला बदलना भी जानते हैं…वो महाराष्ट्र में हार जाते हैं तो जीते हुए दलों की ताकत को अपनी ताकत बना डालते हैं…उनके टूटे हुए नेताओं से अपनी सत्ता सजाते हैं…उनके सासंद घट जाएं… राज्यसभा में ताकत कम नजर आए तो जिधर आंख घुमाते हैं, वहां से सांसद चले आते हैं…विधायक टूटने लग जाते हैं… इतने इकट्ठे हो जाते हैं कि उन्हें हाउसफुल का बोर्ड लगाना पड़ता है…वहां भी पहले आएं और पहले पाएं वाले ही प्रवेश पाते हैं…भाजपाइयों की मुसीबत यह है कि उनकी निष्ठा, उनकी वरिष्ठता, उनकी लोकप्रियता कोई मायने नहीं रखती है…जो दूसरे दल से आता है, वो उनसे ऊपर स्थान पाता है, क्योंकि उसे वादा कर बुलाया जाता है और अपनी साख बचाने और विश्वास बढ़ाने के लिए उन्हें ऊंचे मुकाम तक पहुंचाया जाता है… इस वादे में कई शहीद हो जाते हैं, लेकिन वो मुंह नहीं खोल पाते हैं… सारे खामोश नजर आते हैं… अब नरोत्तम दतिया जला रहे हैं…भाजपा को झुलसा रहे हैं… हकीकत तो यह है कि वो अपना आज और कल दोनों जला रहे हैं…भविष्य की संभावनाओं को मिटा रहे हैं… आक्रोश और भावावेश दो दिन में ठंडा हो जाएगा, लेकिन बगावत का यह दाग कभी मिट नहीं पाएगा…
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