
नई दिल्ली: भारत अंतरिक्ष युद्ध और स्पेस डिफेंस के क्षेत्र में अपनी क्षमता बढ़ाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी कड़ी में DRDO के प्रोजेक्ट वेदा को एक महत्वपूर्ण पहल के तौर पर देखा जा रहा है. VEDA यानी Vehicle for Defence Application को डिफेंस स्पेस एजेंसी के लिए एक मोबाइल डिफेंस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल के रूप में विकसित किए जाने का दावा किया गया है.
सूत्रों के मुताबिक, VEDA को पारंपरिक रॉकेट लॉन्च सिस्टम से अलग बनाया जा रहा है. इसे बड़े Transporter Erector Launcher यानी TEL पर तैनात किया जा सकता है. इसका मतलब है कि इसे किसी एक स्थायी लॉन्च पैड पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं होगी. मोबाइल और कैनिस्टर आधारित सिस्टम होने की वजह से इसे जरूरत के मुताबिक अलग-अलग जगहों से लॉन्च किया जा सकता है. इससे दुश्मन के लिए लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर को पहले से निशाना बनाना मुश्किल हो सकता है.
VEDA में ठोस ईंधन वाले रॉकेट मोटर्स का इस्तेमाल किया जाएगा. सैटेलाइट और लॉन्च सिस्टम को पहले से तैयार और सीलबंद कैनिस्टर में रखा जा सकता है. इससे जरूरत पड़ने पर करीब 24 से 72 घंटे के भीतर सैटेलाइट को ऑर्बिट में भेजने की क्षमता हासिल करने का लक्ष्य है.
आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट का इस्तेमाल कम्युनिकेशन, निगरानी, टारगेट ट्रैकिंग और इंटेलिजेंस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. अगर दुश्मन किसी भारतीय सैटेलाइट को एंटी-सैटेलाइट हथियार, साइबर अटैक या दूसरे तरीकों से नुकसान पहुंचाता है, तो VEDA जैसे सिस्टम के जरिए नए छोटे सैटेलाइट तेजी से लॉन्च किए जा सकते हैं. इसका मकसद युद्ध के दौरान भारत की कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन और ISR यानी Intelligence, Surveillance and Reconnaissance क्षमता को बनाए रखना होगा.
VEDA को नैनो सैटेलाइट और CubeSat जैसे छोटे सैटेलाइट्स के क्लस्टर को एक साथ ऑर्बिट में पहुंचाने के लिए भी डिजाइन किए जाने की बात कही गई है. ऐसे सैटेलाइट्स जमीन पर मौजूद सैन्य कमांडरों को रियल-टाइम या करीब-करीब रियल-टाइम निगरानी, रडार इमेजिंग, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड तस्वीरें तथा सिग्नल इंटेलिजेंस उपलब्ध कराने में मदद कर सकते हैं.
सूत्रों के मुताबिक, VEDA की एक और संभावित भूमिका काउंटर-स्पेस ऑपरेशन बताई गई है. इसमें दुश्मन के सैटेलाइट्स को निष्क्रिय करने के लिए हार्ड-किल और सॉफ्ट-किल जैसी क्षमताओं की बात की गई है. हार्ड-किल में किसी अंतरिक्ष संपत्ति को सीधे टक्कर या इंटरसेप्टर के जरिए नुकसान पहुंचाने की क्षमता शामिल हो सकती है, जबकि सॉफ्ट-किल में जैमिंग, इलेक्ट्रॉनिक अटैक या सेंसर को प्रभावित करने वाली तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है.
मोबाइल और तेजी से लॉन्च किए जा सकने वाले सिस्टम के मामले में चीन का Kuaizhou कार्यक्रम और अमेरिका के क्विक-रिएक्शन स्पेस लॉन्च प्रयासों से VEDA की तुलना की जा रही है.
ये भारत की स्पेस डिफेंस रणनीति में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकती हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा होगा तेजी से लॉन्च, मोबाइल तैनाती और युद्ध के दौरान सैटेलाइट क्षमता को दोबारा खड़ा करने की क्षमता. यानी भविष्य के युद्ध में अगर अंतरिक्ष में भारत की आंखों और कानों को निशाना बनाया जाता है, तो VEDA जैसे सिस्टम के जरिए उन्हें जल्द दोबारा तैनात करने की क्षमता भारत की रणनीतिक मजबूती बढ़ा सकती है.
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