
नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल(West Bengal) में विधानसभा चुनाव(assembly elections) का माहौल गरम(political atmosphere) है और इसी बीच ताजे सर्वे ने राज्य (recent survey)की राजनीति का नया रुख सामने ला दिया है। सर्वे के अनुसार अगर आज लोकसभा चुनाव होते, तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी(Chief Minister Mamata Banerjee’s) की तृणमूल कांग्रेस(Trinamool Congress) (TMC) 2024 के अपने प्रदर्शन को दोहरा सकती है और लगभग सभी सीटें बरकरार रख सकती है। हालांकि भाजपा के लिए भी एक अच्छी खबर है, क्योंकि सर्वे में भाजपा के नेतृत्व वाले NDA(BJP-led NDA) का वोट शेयर 39% से बढ़कर 42% तक पहुंचने की संभावना दिखाई गई है। यह तीन प्रतिशत की बढ़त भाजपा के लिए सकारात्मक मानी जा रही है, लेकिन इस बढ़त के बावजूद बंगाल में बड़े स्तर पर सत्ता परिवर्तन की तस्वीर अभी साफ नहीं दिखती।
विशेष रूप से यह सर्वे(survey) ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव(West Bengal assembly elections) सिर्फ दो महीने दूर हैं। ऐसे में यह सर्वे राज्य की जनता के मौजूदा राजनीतिक मूड(current political mood) का संकेत माना जा रहा है, लेकिन राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि वास्तविक चुनावी नतीजे कई कारकों पर निर्भर करते हैं। फिर भी, सर्वे यह साफ करता है कि बंगाल में अब मुकाबला पूरी तरह TMC और BJP के बीच द्विध्रुवीय होता जा रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार पश्चिम बंगाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण काफी तेज हुआ है और यह राज्य अब साफ तौर पर TMC और BJP के बीच टकराव की दिशा में बढ़ रहा है। अगर पिछले सर्वे को देखा जाए तो फरवरी 2024 में TMC को 22 सीटें और BJP को 19 सीटें मिलने का अनुमान था। बाद में अगस्त 2024 में TMC के 32 और BJP के 8 सीटें मिलने की संभावना जताई गई थी। अब ताजे सर्वे में भाजपा का वोट शेयर बढ़ा है, लेकिन फिर भी TMC की पकड़ मजबूत दिखती है और ममता बनर्जी की छवि बंगाल में एक प्रमुख राजनीतिक धुरी बनी हुई है।
सर्वे के मुताबिक, BJP के वोट शेयर में बढ़ोतरी के बावजूद वह बंगाल में कोई बड़ा उलटफेर करने की स्थिति में नहीं दिख रही। तृणमूल कांग्रेस की मजबूत सामाजिक और क्षेत्रीय जड़ों के कारण भद्रलोक और ग्रामीण इलाकों में उसकी पकड़ अभी भी टेढ़ी खाई बनी हुई है। वहीं BJP धीरे-धीरे अपना आधार बढ़ा रही है, खासकर कुछ खास इलाकों में जहां पार्टी का संगठन मजबूत हो रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक यह मान रहे हैं कि यदि चुनाव तक इसी तरह का जनाधार बना रहता है तो बंगाल में कमल का फूल खिलाने का भाजपा का सपना अधूरा रह सकता है। वहीं, ममता बनर्जी के लिए यह सर्वे एक राहत भरा संकेत है कि उनकी पार्टी के प्रति लोगों की विश्वास की लहर अभी भी कायम है। लेकिन यह भी स्पष्ट है कि भाजपा की बढ़ती ताकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, क्योंकि राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण और वोट शेयर के बदलाव भविष्य में किसी भी मोड़ पर निर्णायक साबित हो सकते हैं।
अगले कुछ हफ्तों में चुनावी प्रचार, घोषणापत्र, गठबंधन रणनीति और स्थानीय मुद्दों का प्रभाव नतीजों को बदल सकता है। फिलहाल सर्वे यह संकेत दे रहा है कि बंगाल में TMC का प्रभाव अभी भी मजबूत है और BJP को बड़े स्तर पर सत्ता परिवर्तन के लिए अभी और मेहनत करनी होगी। ऐसे में बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य पर नजरें टिके हुए हैं, क्योंकि आने वाले चुनावी माहौल में हर छोटा-सा बदलाव भी बड़े नतीजे ला सकता है।
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