
इंदौर। बीआरटीएस कॉरिडोर वाले क्षेत्र में 6 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की दिशा में कदमताल तो शुरू हो गई, लेकिन अब यह हकीकत सामने आई है कि इस क्षेत्र में यातायात की स्थिति को समझने के लिए किसी भी विभाग ने सर्व ही नहीं करवाया। यह खुलासा कल प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा रेसीडेंसी कोठी में ली गई बैठक के दौरान बहस में हुआ।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रोजेक्ट मंजूर करते हुए निर्देश दिया था कि जनप्रतिनिधियों के साथ इस प्रोजेक्ट के लिए मीटिंग कर लीजिए। जनप्रतिनिधि जितनी लंबाई का कहें उतनी लंबाई का इस कॉरिडोर को बना दीजिए। जितने स्थान पर आवश्यक हो उतने स्थान पर इसकी भुजा दे दीजिए, हमें कोई दिक्कत नहीं है। यह कहते हुए मुख्यमंत्री द्वारा एलिवेटेड कॉरिडोर के 4 साल पुराने प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई थी। इसके साथ ही लोक निर्माण विभाग को इस प्रोजेक्ट को क्रियान्वित करने के लिए कहा गया था। मुख्यमंत्री के निर्देश के परिप्रेक्ष्य में प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा कल रेसीडेंसी कोठी पर इस प्रोजेक्ट के संबंध में बैठक ली गई। बैठक में जब एलिवेटेड कॉरिडोर की उपयोगिता पर चर्चा शुरू हुई तो यह हकीकत सामने आई कि किसी भी विभाग ने इस कॉरिडोर के लिए बीआरटीएस वाले कॉरिडोर पर यातायात की स्थिति का सर्वे नहीं कराया है।
बैठक में चर्चा के दौरान एक्रोपोलिस कॉलेज के प्रतिनिधि ने कहा कि हमारे कॉलेज द्वारा 2024 में सर्वे कराया गया था। इस सर्वे में हमने यातायात की स्थिति को देखा था। जैसे ही इस प्रतिनिधि द्वारा अपने सर्वे और उसकी रिपोर्ट के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई वैसे ही लोक निर्माण विभाग की कार्यपालक यंत्री गुरमीत कौर भाटिया ने कहा कि इनकी स्टडी पूरी तरह से गलत थी। उस सर्वे में एक भी डाटा सही नहीं था। हर डाटा संभावित रूप से दिया गया था। उन्होंने जानकारी दी कि उनके विभाग द्वारा 2019 में सर्वे कराया गया था और उसमें पाया गया था कि यदि एलिवेटेड कॉरिडोर बनाया जाता है तो 32 फीसदी यातायात इस पर से जाएगा। आईआईटी दिल्ली के पासआउट अंशुल अग्रवाल ने कहा कि 25 फीट चौड़ाई में 6.5 किलोमीटर का एलिवेटेड कॉरिडोर बनाना एक अपराध है। उनका कहना था कि इस कॉरिडोर में आने और जाने की दो-दो लाइन का प्रावधान किया गया है, इसके कारण कॉरिडोर पर जाम लगेगा। जब भी एक गाड़ी खराब हो जाएगी तो यातायात को निकलना मुश्किल हो जाएगा। इस कॉरिडोर के लिए जो भी सर्वे हुए सभी बीआरटीएस कॉरिडोर हटाने के पहले हुए हैं। ऐसे में यह सभी सर्वे किसी उपयोग के नहीं बचे। ऐसी स्थिति में आवश्यक है कि नए सिरे से सर्वे कराया जाए। इसके साथ ही उन्होंने लोक निर्माण विभाग द्वारा इस कॉरिडोर को 2 साल की अवधि में बनाए जाने के दावे पर भी प्रश्न चिह्न लगाया। इंजीनियर अतुल सेठ ने पीडब्ल्यूडी के सर्वे पर सवालिया निशान लगाया। उन्होंने कहा कि यह सर्वे गूगल के आधार पर करके रख दिया गया। आज तक अपनी सर्वे रिपोर्ट भी पीडब्ल्यूडी ने किसी को नहीं दिखाई है। इंजीनियर श्रीनिवास कुटुंबले ने कहा कि लोक निर्माण विभाग का सर्वे प्रॉपर नहीं है। इंदौर उत्थान अभियान के अजीतसिंह नारंग ने भी इस सर्वे रिपोर्ट की हकीकत पर सवालिया निशान लगाया। उन्होंने भी कहा कि यह सर्वे सही तरीके से नहीं हुआ है।
रोटरी बनाने को लेकर विवाद
बैठक में रोटरी बनाने को लेकर भी जमकर विवाद हुआ। अजीतसिंह नारंग का कहना था कि तीनों प्रमुख चौराहों पर एलिवेटेड रोटरी बनाई जाए और उसे सिग्नल-फ्री किया जाए। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के सिग्नल आ गए हैं, जिसके कारण यातायात बंट जाता है। ऐसी व्यवस्था जबलपुर और नागपुर में की गई है। इसके अलावा 10 शहर देश के ऐसे हैं, जहां इस तरह की व्यवस्था प्रभावित है। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि एलिवेटेड रोटरी में भी अच्छी है। अब तो रोटरी के भी एक्सपर्ट आ गए हैं, जो स्पेशलिस्ट कहलाते हैं। इस बारे में हमें उनसे ही सलाह लेना चाहिए।
एलिवेटेड कॉरिडोर को राऊ से देवास नाका तक करने की मांग
जनप्रतिनिधियों ने पुराने एबी रोड पर एलिवेटेड कॉरिडोर को राऊ से लेकर देवास नाका तक बनाने की मांग की। इसके साथ ही इस कॉरिडोर की चौड़ाई को फोर लेन से बढ़ाकर सिक्स लेन करने की भी मांग उठाई गई। नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की उपस्थिति में हुई बैठक में राऊ के विधायक मधु वर्मा ने सबसे पहले कहा कि इस कॉरिडोर को छोटी खजरानी से नौलखा तक बनाने से सुगम यातायात का मकसद पूरा नहीं होगा। इस कॉरिडोर को एक तरफ जहां राऊ तक बढ़ाया जाना चाहिए, वहीं दूसरी तरफ इसे देवास नाका तक बढ़ाया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि इस कॉरिडोर में आने और जाने की दो-दो लेन का जो प्रावधान है वह उचित नहीं है। इसे कम से कम तीन-तीन लेन किया जाना चाहिए। इस पर बैठक में मौजूद लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने कहा कि यदि इसकी चौड़ाई बढ़ा देंगे तो नीचे की सडक़ पर समस्या आएगी। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि एलआईजी से नौलखा तक सडक़ की चौड़ाई ही 100 फीट है, ऐसे में यदि पुल की चौड़ाई को भी बढ़ा दिया गया तो मुश्किल हो जाएगी। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि इस कॉरिडोर के बनने से ऊपर की तरफ चार लाइन में ट्रैफिक चल सकेगा और नीचे की तरफ छह लाइन रहेंगी। इस तरह कुल 10 लाइन से पूरा ट्रैफिक बहुत आसानी से निकल जाएगा। पूर्व सांसद सुमित्रा महाजन ने कहा कि इस प्रोजेक्ट को राऊ तक लिया जाना चाहिए। अभी वैसे भी राजेंद्र नगर ब्रिज की भुजा राऊ तक जा रही है। दूसरी तरफ यह ब्रिज मांगलिया तक बनाया जाना चाहिए। हमें यह सोचना होगा कि निर्माण इस तरह से हो कि अगले 30 साल की इंदौर की यातायात की आवश्यकता की पूर्ति हो जाए। इस मामले को लेकर जब बैठक में मौजूद इंजीनियरों के बीच विवाद की स्थिति ज्यादा होने लगी तो हस्तक्षेप करते हुए विजयवर्गीय ने कहा कि अभी रोटरी को छोड़ो और एलिवेटेड कॉरिडोर के बारे में बात करो।
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