तेहरान। पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी युद्ध अब खाड़ी देशों के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। हाल ही में अमेरिका और इजरायल की वायुसेना (The Israeli Air Force) ने ईरान के अहम तेल केंद्र (Kharg Island) पर भारी बमबारी की। यह द्वीप ईरान के तेल निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके बाद अब तेहरान ने पलटवार के संकेत दिए हैं और संयुक्त अरब अमीरात के कुछ प्रमुख बंदरगाहों के आसपास रहने वाले लोगों को क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दी है।
सूत्रों का कहना है कि इन स्थानों के आसपास अमेरिकी सैन्य बलों की मौजूदगी है और वे नागरिक क्षेत्रों की आड़ में काम कर रहे हैं। इसी वजह से ये इलाके संभावित हमले के निशाने पर आ सकते हैं।
ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की सीधी चेतावनी
इस बीच ईरान की सेना की प्रमुख इकाई Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने भी यूएई प्रशासन को चेतावनी दी है। संगठन के प्रवक्ता ने कहा कि अगर अमेरिकी बल अमीराती शहरों की आड़ में सैन्य गतिविधियां जारी रखते हैं, तो ईरान उन बंदरगाहों और घाटों को निशाना बनाना अपना “वैध अधिकार” मानता है।
आईआरजीसी ने यह भी संकेत दिया कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों को भी निशाना बनाया जा सकता है, चाहे अमेरिका के नेता कुछ भी बयान दें।
यूएई पहले से झेल रहा है ड्रोन और मिसाइल हमले
दरअसल 28 फरवरी को ईरान पर हुए हमले के बाद से यूएई लगातार ड्रोन और मिसाइल हमलों की आशंका का सामना कर रहा है। यूएई और अमेरिका का संयुक्त एयर डिफेंस सिस्टम कई हमलों को रोकने की कोशिश कर रहा है, लेकिन यह सुरक्षा अभियान काफी महंगा साबित हो रहा है।
शुक्रवार को भी यूएई अधिकारियों ने बताया कि एक ड्रोन को हवा में ही मार गिराया गया। हालांकि उसके मलबे के गिरने से एक इलाके में आग लग गई।
फुजैरा पोर्ट पर भी बढ़ा खतरा
इसी दौरान Port of Fujairah के आसपास काला धुआं उठते देखे जाने की खबरें भी सामने आई हैं। यह बंदरगाह क्षेत्र का बड़ा तेल भंडारण और व्यापार केंद्र है तथा महत्वपूर्ण निर्यात टर्मिनल के रूप में जाना जाता है।
बताया जा रहा है कि इसी महीने की शुरुआत में हुए ड्रोन हमलों में फुजैरा के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को भी निशाना बनाया गया था, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
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