
इंदौर। रालामण्डल (Ralamandal) की रेस्क्यू टीम पिछले लगभग 10 दिन बाद भी गम्भीर रूप से घायल तेंदुए का एक्सरे नहीं करवा पाई, जबकि वन विभाग के ही अधिकारियों का कहना है कि कुएं में ऊंचाई से गिरने के कारण तेंदुए का पिछला हिस्सा काम नहीं कर रहा है।
रालामण्डल के अधिकारी एक्सरे करवाने के मामले में कभी चिडिय़ाघर के वेटरनरी डाक्टर 15 दिन छुट्टी पर यह बोलकर तो कभी महू ले जाकर एक्सरे करवा लेंगे, यह कहकर इस तरह पिछले 10 दिनों से टालमटोल करते आ रहे हैं। रालामण्डल का कोई भी अधिकारी घायल तेंदुए का एक्सरे कराने को तैयार नहीं है। तेंदुए का एक्सरे कराना जरूरी है, जिससे पता चल सके कि उसके पैर में फ्रैक्चर है या उसकी रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर है।
अग्निबाण की खबर पढऩे के बाद सीनियर एक्सरे टेक्नीशियन डाक्टर शिवाकांत बाजपेयी ने अग्निबाण को फोन करके कहा कि यदि वन विभाग के अधिकारी बोले तो वह रालामण्डल जाकर उसके पिंजरे में कैद तेंदुए का पोर्टेबल एक्सरे मशीन से उसका एक्स-रे करने को तैयार है।
बाजपेयी ने कहा कि वह पहले भी साल 2009 में रालामण्डल जाकर पिंजरे में मौजूद तेंदुए का एक्सरे कर चुके हैं। इसके लिए शासन से सम्मानित भी हो चुके हैं। एक्सरे टेक्नीशियन डाक्टर बाजपेयी की यह बात, उनका फोन नम्बर रालामण्डल के अधिकारी तक पहुंचा दिया है, मगर आज सुबह जब एसडीओ प्रियंका बामनिया से बात की तो उन्होंने कहा कि मेरा खुद का स्वास्थ्य खराब है। कुल मिलाकर इससे जाहिर होता है कि वन्यजीव के संरक्षण को लेकर रालामण्डल की रेस्क्यू टीम और चिडिय़ाघर के कर्ता-धर्ता कितने लापरवाह हैं।
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