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पड़ोसी देशों के लिए एफडीआई नियमों में ढील, जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी

March 10, 2026

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक अहम कदम उठाते हुए, चीन सहित भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को आसान बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने इस बहुप्रतीक्षित प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब भारत का चीन के साथ व्यापारिक घाटा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है।

किस नियम में किया गया बदलाव?
इस अहम फैसले के तहत सरकार ने 2020 में जारी ‘प्रेस नोट 3’ के प्रावधानों में ढील दी है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय कंपनियों के अवसरवादी अधिग्रहण को रोकने के लिए यह सख्त नियम लागू किया गया था। पुराने नियमों के अनुसार, भारत के साथ जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों- चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमार और अफगानिस्तान- से आने वाले किसी भी निवेश के लिए सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य कर दी गई थी।

गौरतलब है कि जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में भारी तनाव आ गया था। इसके परिणामस्वरूप, भारत सरकार ने टिकटॉक, वीचैट और यूसी ब्राउजर जैसे 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप्स पर प्रतिबंध लगा दिया था।

देश में रणनीतिक बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने के लिए भी केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंगलवार को बताया कि ‘स्ट्रैटेजिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड कनेक्टिविटी इन्वेस्टमेंट एजेंडा 2024’ के तहत कैबिनेट ने कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये की विभिन्न महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को अपनी मंजूरी दे दी है। इन फैसलों में रेलवे, हाईवे, एविएशन और ग्रामीण जल आपूर्ति जैसे प्रमुख सेक्टर्स शामिल हैं, जो अर्थव्यवस्था को गति देने में अहम भूमिका निभाएंगे।

कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए कुल 8.8 लाख करोड़ रुपये के फंड में से सबसे बड़ा हिस्सा बुनियादी जरूरतों और ग्रामीण विकास पर केंद्रित है। सरकार ने ‘जल जीवन मिशन’ के विस्तार के लिए 8.7 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कैबिनेट ने जल जीवन मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ाने की मंजूरी दे दी है।

बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और परिवहन को सुगम बनाने के लिए सरकार ने कई प्रमुख रेलवे और सड़क परियोजनाओं के साथ-साथ विमानन क्षेत्र के लिए अहम फैसले लिए हैं।

एविएशन सेक्टर: एक प्रमुख नीतिगत फैसले के तहत मदुरै एयरपोर्ट को इंटरनेशनल एयरपोर्ट (अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा) घोषित किया गया है।

रोड नेटवर्क: जेवर एयरपोर्ट और फरीदाबाद सेक्शन को जोड़ने वाले एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए 3,631 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं। इसके अलावा, बदनावर-थांदला-टिमरवानी (NH 752 D) राजमार्ग को 4-लेन बनाने के लिए 3,839 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर: रेल यातायात की भीड़ कम करने और माल ढुलाई को तेज करने के लिए संतरागाछी-खड़गपुर के बीच चौथी लाइन बिछाने के लिए 2,905 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इसी तरह सैंथिया-पाकुड़ के बीच चौथी रेलवे लाइन के लिए 1,569 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।

भले ही सरकार ने अब नियमों में ढील दी है, लेकिन ऐतिहासिक रूप से भारत में चीनी निवेश का हिस्सा बहुत कम रहा है।

अप्रैल 2000 से दिसंबर 2021 के बीच भारत में हुए कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी मात्र 0.43% (2.45 बिलियन डॉलर) रही है।

बढ़ता व्यापार: न्यूनतम निवेश के बावजूद, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार कई गुना बढ़ा है और बीजिंग भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार बनकर उभरा है।
आयात-निर्यात: वर्ष 2024-25 में चीन से भारत का आयात 11.52% बढ़कर 113.45 बिलियन डॉलर हो गया, जबकि निर्यात 14.5% घटकर 14.25 बिलियन डॉलर रहा।

वर्तमान रुझान: चालू वित्त वर्ष (अप्रैल-जनवरी 2025-26) के दौरान चीन को होने वाले भारतीय निर्यात में 38.37% का भारी उछाल आया है (15.88 बिलियन डॉलर), वहीं आयात भी 13.82% बढ़कर 108.18 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया है। इस अवधि में व्यापार घाटा 92.3 बिलियन डॉलर दर्ज किया गया है।

अन्य महत्वपूर्ण फैसले
एफडीआई नियमों में ढील देने के साथ-साथ, कैबिनेट ने कॉरपोरेट सेक्टर को राहत देने वाले दो अन्य महत्वपूर्ण विधेयकों को भी मंजूरी दी है। दिवाला प्रक्रिया को और अधिक सुचारू बनाने के लिए ‘इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) बिल 2025’ में संशोधनों को मंजूरी दी गई है। यह बदलाव सेलेक्ट कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर किया गया है। इसके अलावा, कंपनियों के कामकाज को बेहतर बनाने के उद्देश्य से ‘कॉरपोरेट कानून संशोधन विधेयक’ को भी हरी झंडी दी गई है।

चीन और अन्य पड़ोसी देशों के लिए एफडीआई नियमों में यह ढील विदेशी पूंजी प्रवाह को फिर से गति देने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत बदलाव है। यह कदम दर्शाता है कि सरकार भू-राजनीतिक चुनौतियों के बीच घरेलू औद्योगिक विकास और सप्लाई चेन की जरूरतों को संतुलित करने का प्रयास कर रही है। इससे उन क्षेत्रों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें तकनीकी और पूंजीगत विस्तार के लिए विदेशी निवेश की सख्त दरकार है।

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