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इंदौर में ट्रकों पर होने वाली कलाकारी को शूट करने आए यूएसए के फिल्ममेकर

February 22, 2026

  • बीते छह साल कई विदेशी डाक्यूमेंट्री हो चुकी हैं तैयार, वॉइस एशिया, जर्मनी, नीदरलैंड और ऑस्ट्रेलिया से भी आ चुकी है टीम

इन्दौर। देशभर की सडक़ों पर दौड़ते हमारे रंग-बिरंगे ट्रकों पर विदेशी डाक्यूमेंट्री बना रहे हैं। कल यूएसए से आई एक टीम ने इंदौर के एक कलाकार के साथ शॉर्ट फिल्म शूट की है। यह पहला मौका नहीं है, जब ट्रक पर ब्रश चलाने वाले इंदौर के इस कलाकार के साथ शूट करने के लिए विदेशी आए हो। इससे पहले भी फ्रांस, जर्मनी, नीदरलैंड, ऑस्ट्रेलिया की टीम आकर शॉर्ट फिल्म से लेकर डॉक्यूमेंट्री शूट कर चुकी है।

नफीस अहमद खान (57) के साथ कल उनके काम को लेकर यूएसए से आए दो फिल्मेकर ने शूट किया है। वे हैदराबाद से एक गाइड को भी साथ लेकर आए थे। फेसबुक प्रोफाइल पर उनके काम को देख उनसे संपर्क किया और कल टीम यहां पहुंची। खान ने बताया कि कल एक ट्रक पर साउथ की फिल्म ‘पुष्पा’ के कैरेक्टर को उतार रहे थे, जिसे लेकर ही शूट किया गया है और मुझसे मेरे सफर से साथ ही ट्रकों पर होने वाली कलाकारी की जानकारी ली गई है। यूएसए से ग्राहम नाम के फिल्म मेकर ने कुछ दिन पहले मुझसे फेसबुक पर संपर्क किया था। खान इससे पहले भी कई ऐसे सैकड़ों ट्रकों पर अपनी कलाकारी दिखा चुके हैं। पिछले साल फ्रांस टीवी ने भी पूरे एक दिन अजीज पटेल के कारखाने पर नफीस अहमद खान के साथ शूट किया था।


  • स्कूलों में मुफ्त में सिखाते हैं कैलिग्राफी
    1986 में नफीस अपने परिवार के साथ राजस्थान झालावाड़ से इंदौर आए और यहीं के होकर रह गए। बताते हैं कि राजस्थान की रंग-बिरंगी संस्कृति ने इतना प्रभावित किया कि यहां आकर पढ़ाई के साथ-साथ ट्रकों पर ब्रश चलाने लगे। उन्होंने अपनी मां से उर्दू और अरबी की कैलिग्राफी सीखी और अब अपने इसी हुनर का इस्तेमाल ट्रकों को सुंदर बनाने में करते हैं। साथ ही इंदौर के स्कूलों में हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, अरबी की कैलिग्राफी भी मुफ्त सिखाते हैं। इस काम को करते हुए तीस साल से ज्यादा का समय हो गया है और अब बेटा भी पढ़ाई के साथ इसमें साथ देता है।

    राज्य बदलने के साथ बदलती है पसंद
    ट्रकों पर कलाकारी राज्यों के अनुसार बदलती है। महाराष्ट्र के ट्रक ड्रायवर उनके आदर्श महापुरुषों को बनवाते हैं, तो पंजाब के ट्रक ड्रायवर फिल्मों के किरदार और गायक। कहीं के ट्रक ड्रायवर्स को केवल गांव के नजारे ही पसंद आते हैं, किसी को शेर-शायरी। उद्योगों की रीढ़ कहे जाने वाले कई ट्रक बड़ी कंपनियों के लिए विज्ञापन और ब्रांडिंग का काम भी करते हैं। आज का समय ‘पुष्पा’ और ‘केजीएफ’ जैसे किरदारों का है। ट्रकों के पीछे यह ज्यादा नजर आ रहे हैं। नफीस के साथ इससे पहले वॉइस एशिया टीवी चैनल, जर्मनी टीवी शो, नीदरलैंड का एक टीवी शो, ऑस्ट्रेलिया का न्यूज चैनल भी शूट कर चुका है। पुणे की एक यूनिवर्सिटी और डीएवीवी भी इस पर शूट और रिसर्च कर चुकी है।

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