
वाशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) की धमकियों के बीच ग्रीनलैंड (Greenland) भी अलर्ट मोड में है। खबर है कि ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स फ्रेडरिक नीलसन (Prime Minister Jens Frederik Nielsen) ने नागरिकों से ‘संभावित सैन्य आक्रमण’ के लिए तैयार रहने के लिए कहा है। हालांकि, उन्होंने कहा है कि इसकी संभावनाएं कम ही हैं। ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि सुरक्षा कारणों के चलते अमेरिका को ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की जरूरत है। कुछ समय पहले ही उन्होंने एक एआई फोटो जारी की थी, जिसमें आईलैंड पर अमेरिकी झंडा लगाए दिखाया गया था।
मंगलवार को नीलसन ने कहा, ‘सैन्य संघर्ष होने की संभावनाएं नहीं हैं, लेकिन इससे पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।’
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ग्रीनलैंड सरकार संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर टास्क फोर्स का गठन करने जा रही है। पीएम ने बताया है कि यह फोर्स दैनिक जीवन में आने वाली किसी भी उथल पुथल के लिए तैयार करेगी, जिसमें कम से कम 5 दिनों के लिए घर में भोजन की व्यवस्था करने की सिफारिश शामिल है।
ट्रंप का मिशन ग्रीनलैंड
ट्रंप ने मंगलवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर जारी की। इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि ट्रंप ग्रीनलैंड की जमीन पर अमेरिकी ध्वज लगा रहे हैं। तस्वीर में उनके साथ उप-राष्ट्रपति जेडी वैंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो खड़े हैं। करीब ही एक बोर्ड पर लिखा है, “ग्रीनलैंड, अमेरिकी क्षेत्र, 2026 में स्थापित।”
इससे पहले ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक और एआई से बनी तस्वीर पोस्ट की। इसमें वह व्हाइट हाउस में अपने कार्यालय द ओवल में यूरोपीय नेताओं के साथ बैठक कर रहे हैं और करीब में ही अमेरिकी महाद्वीप का एक नक्शा है। इस नक्शे में कनाडा और ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा दिखाया गया है।
ट्रंप ने हाल के दिनों में ग्रीनलैंड को ‘खरीदने’ और अमेरिका के कब्जे में करने की मंशा जाहिर की है। उन्होंने हाल ही में नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोर को लिखे एक पत्र में कहा था कि क्योंकि उन्हें नॉबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित नहीं किया गया इसलिये अब वह शांति बरकरार रखने के लिए बाध्य नहीं हैं।
ग्रीनलैंड के मुद्दे पर डेनमार्क, फ्रांस और ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों ने ट्रंप के रुख किया विरोध किया है, जबकि ट्रंप का कहना है कि जो देश इस मुद्दे पर उनका साथ नहीं देंगे, उन्हें टैरिफ का सामना करना पड़ेगा।
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