
नई दिल्ली। फ्रांस (France) में महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं (Inflation and Public Services) की बदहाल स्थिति को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन (Protest) हिंसक रूप ले चुका है। लगातार दूसरी रात देश के कई शहरों में आगजनी, लूटपाट और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पों के बाद हालात संभालने के लिए सुरक्षा बलों को कार्रवाई करनी पड़ी। गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, अब तक करीब 2,400 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि लगभग 1,000 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। शनिवार को देशभर में पांच लाख से अधिक लोग प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतरे थे। इनमें से अधिकांश ने शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जताया, लेकिन कुछ स्थानों पर दुकानों में लूटपाट, पुलिस वाहनों पर हमले और सरकारी इमारतों में आगजनी की घटनाएं हुईं।
राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को देश को संबोधित करते हुए हिंसा पर नाराजगी जताई और लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में हिंसा और तोड़फोड़ को उचित नहीं ठहराया जा सकता। सरकार के सामने अब एक ओर महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर लोगों की नाराजगी दूर करने, तो दूसरी ओर हिंसक घटनाओं पर काबू पाने की चुनौती है।
मैक्रों बोले- शांतिपूर्ण मांगों को हिंसा से न जोड़ें
राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने संबोधन में स्वीकार किया कि महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़ी समस्याओं को लेकर प्रदर्शनकारियों की कुछ मांगें जायज हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने वाले लोगों की मांगों को हिंसा और तोड़फोड़ करने वालों की गतिविधियों के साथ जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए।
मैक्रों ने हिंसक घटनाओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि फ्रांस के नागरिक अपने ही देश को नुकसान कैसे पहुंचा सकते हैं। उन्होंने फिलहाल देश में आपातकाल लगाने की घोषणा नहीं की, लेकिन संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर स्थानीय प्रशासन को कुछ प्रदर्शनों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार दिया जा सकता है। इसका उद्देश्य सरकारी इमारतों, दुकानों और अन्य कारोबारी प्रतिष्ठानों को नुकसान से बचाना है।
पेरिस और मार्सेई में फिर भिड़े प्रदर्शनकारी-पुलिस
रविवार को राजधानी पेरिस और मार्सेई में एक बार फिर प्रदर्शनकारियों तथा पुलिस के बीच झड़पें हुईं। पेरिस के प्लास द ला रिपब्लिक इलाके में पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने साइकिलों के ढेर में आग लगा दी। पुलिस ने कई जगह दुकानों में लूटपाट रोकने के लिए कार्रवाई की।
प्रदर्शन के दौरान महंगे सामान बेचने वाले शोरूम और सुपरमार्केट भी निशाने पर रहे। हिंसा के बाद कई शहरों में सफाई और क्षतिग्रस्त संपत्तियों की मरम्मत का काम शुरू किया गया है।
लिमोज में ऐतिहासिक टाउन हॉल को भारी नुकसान
मध्य फ्रांस के लिमोज शहर में आगजनी की घटना में ऐतिहासिक टाउन हॉल को भारी नुकसान पहुंचा। आग की वजह से इमारत का क्लॉक टावर ढह गया। शहर के मेयर गिलौम गेरां ने आरोप लगाया कि इमारत को जानबूझकर निशाना बनाया गया। उन्होंने बताया कि घटना के समय टाउन हॉल के अंदर मौजूद लोगों को अपनी जान का खतरा महसूस हुआ।
मेयर ने चेतावनी दी कि यदि शहर को मरम्मत के लिए जरूरी सरकारी सहायता नहीं मिली, तो वह अपने पद से इस्तीफा देने पर विचार कर सकते हैं। टाउन हॉल में हुई तबाही ने लोगों को वर्ष 2019 में पेरिस के ऐतिहासिक नोट्रे डेम कैथेड्रल में लगी भीषण आग की याद दिला दी।
राजनीतिक दलों ने भी की शांति की अपील
हिंसा को लेकर फ्रांस के राजनीतिक नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। दक्षिणपंथी नेशनल रैली की नेता मरीन ले पेन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि हिंसा कोई विचार नहीं है और तोड़फोड़ को अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। उन्होंने कहा कि फ्रांस का भविष्य अराजकता के सहारे नहीं बनाया जा सकता।
वहीं, वामपंथी नेता जीन-ल्यूक मेलेंशों ने राष्ट्रपति मैक्रों से प्रदर्शन कर रहे हाईस्कूल के छात्रों की मांगों पर ध्यान देने को कहा। अर्थव्यवस्था मंत्री रोलां लेस्क्योर ने हिंसा से प्रभावित कारोबारियों को सरकारी सहायता देने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि नुकसान के लिए जिम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराया जाएगा और उनसे क्षतिपूर्ति भी कराई जाएगी।
कैरेफोर के 50 स्टोर प्रभावित, करोड़ों यूरो का नुकसान
हिंसा का असर फ्रांस के कारोबार पर भी पड़ा है। रिटेल कंपनी कैरेफोर के प्रमुख एलेक्जेंडर बोम्पार्ड के अनुसार, कंपनी के 50 स्टोर को नुकसान पहुंचा है। इनमें से 20 स्टोर में लूटपाट की गई। कंपनी को हुए नुकसान का अनुमान कई करोड़ यूरो तक लगाया गया है।
लगातार जारी हिंसा ने मैक्रों सरकार के सामने सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है। सरकार को महंगाई और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर बढ़ती नाराजगी का समाधान तलाशने के साथ ही सार्वजनिक संपत्ति, दुकानों और कारोबार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी है। राष्ट्रपति मैक्रों का मौजूदा कार्यकाल 2027 में समाप्त होना है। ऐसे में बढ़ता सामाजिक असंतोष और आर्थिक दबाव सरकार के लिए अहम मुद्दे बने हुए हैं।
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