नई दिल्ली। भारतीय सेना (Indian Army) में पुनर्गठन का काम जारी है और नए तरह की बटालियन से लेकर ब्रिगेड तक बन रही है। एक तरफ जहां तीनों सेनाओं के बीच जॉइंटनेस पर काम हो रहा है वहीं भारतीय सेना के भीतर भी अलग अलग आर्म्स (शाखाओं) के बीच ज्यादा तालमेल और एकीकरण पर जोर है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि पिछले 14-15 महीनों में ही सेना में संगठन बदलाओं के लिए सरकार ने 31 सेंग्शन लेटर जारी की हैं। इसमें इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप बनाने से लेकर एविएशन ब्रिगेड बनाने जैसे बड़े और अहम फैसले शामिल हैं।
7 रुद्र ब्रिगेड
बटालियन से ऊपर की इकाई है ब्रिगेड। सेना में 7 रुद्र ब्रिगेड भी बनाई जा रही हैं, जिसमें से दो रूद्र ब्रिगेड बन गई हैं। अभी इंफ्रेंट्री की ब्रिगेड में इंफ्रेंटी की यूनिट, इसी तरह आर्टिलरी की ब्रिगेड में आर्टिलरी यूनिट होती हैं। रूद्र ब्रिगेड में इंफ्रेंट्री के साथ ही आर्टिलरी, जरूरत के हिसाब से आर्म्ड या दूसरी आर्म की भी यूनिट हैं।
इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप
ब्रिगेड के साइज से बड़ी लेकिन डिविजन से छोटे इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप भी बनाए जा रहे हैं। कुछ सालों से इनकी एक्सरसाइज चल रही थी और अब इसे सरकार की मंजूरी भी मिल गई है। अभी चार इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप यानी आईबीजी बनाई जा रही हैं, बाद में इनसे सीख लेते हुए और ग्रुप बनाए जाएंगे और जरूरत के हिसाब से बदलाव किए जाएंगे। एक आईबीजी पाकिस्तान बॉर्डर पर भी फोकस करेगा। एक इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप में करीब 5000 से 7000 सैनिक होंगे। एक सामान्य ब्रिगेड में करीब 3000 हजार और एक डिवीजन में करीब 10 हजार सैनिक होते हैं। आईबीजी को मेजर जनरल रैंक के अधिकारी हेड करेंगे। इसमें भी पैदल सैनिक, टैंक, तोप, एयर डिफेंस, इंजीनियर्स, सिगनल, लॉजिस्टिक सभी एलिमेंट होंगे।
अश्नि प्लाटून
भारतीय सेना की हर पैदल सेना बटालियन में अश्नि प्लाटून बना दी गई है। ये ड्रोन प्लाटून हैं। यानी सभी बटालियन के पास अब ड्रोन भी हैं और उन्हें चलाने वाले सैनिक भी। जरूरत के हिसाब से अलग अलग ड्रोन बटालियन के पास हैं और उसी हिसाब से सैनिकों को ट्रेनिंग भी दी जा रही है।
शक्तिबाण और दिव्यास्त्र
पारंपरिक आर्टिलरी रेजिमेंट में से कुछ रेजिमेंट को शक्तिबाण रेजिमेंट में तब्दील किया जा रहा है। आर्टिलरी (तोपखाना) में 15 शक्तिबाण रेजिमेंट बनाई जा चुकी हैं और 11 और बनाई जानी हैं। जहां पारंपरिक आर्टिलरी रेजिमेंट में तोप होती हैं वहीं शक्तिबाण रेजिमेंट में ड्रोन, स्वॉर्म ड्रोन और लॉइटरिंग एम्युनिशन हैं। जिससे इनकी रेंज बढ़ती है। सेना प्रमुख जनरल द्विवेदी ने कहा कि शक्तिबाण रेजिमेंट की रेंज शुरू में 100 से 400 किलोमीटर तक होगी फिर इसे 700 से 1000 किलोमीटर तक किया जाएगा। जो तोपखाना रेजिमेंट शक्तिबाण में तब्दील नहीं होंगी उनमें दिव्यास्त्र बैटरी होगी। शुरू में 34 दिव्यास्त्र बैटरी बनाई जा रही हैं। दिव्यास्त्र बैटरी के पास ड्रोन और लॉइटरिंग एम्युनिशन होंगे। शक्तिबाण और दिव्यास्त्र से भारतीय सेना के तोपखाने की मारक क्षमता बढ़ेगी।
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