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गूगल अर्थ की डिजिटल इमेज बनी मुख्य गवाह, अवैध कॉलोनी निर्माण पर 4.08 करोड़ का दंड

April 03, 2026

  • शोभापुर पहाड़ी को समतल कर बनाई जा रही थी कॉलोनी,कलेक्टर ने लिया एक्शन

जबलपुर। राँझी तहसील अंतर्गत ग्राम भड़पुरा में शोभापुर पहाड़ी के अस्तित्व को मिटाकर वहां आवासीय कॉलोनी विकसित करने के मामले में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने इस प्रकरण में प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ और खनिजों के अवैध दोहन को लेकर कॉलोनाइजर और सात भूमि स्वामियों पर कुल 4 करोड़ 08 लाख रुपये का भारी-भरकम अर्थदंड अधिरोपित किया है। यह कार्रवाई राजस्व और खनिज विभाग की संयुक्त जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है।


  • पुख्ता प्रमाण मिलने पर हुई कार्रवाई
    इस मामले की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी तकनीकी साक्ष्य रहे हैं। कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के साथ वर्ष 2019 से 2025 तक की गूगल अर्थ की डिजिटल इमेज संलग्न की गई थीं। इन सैटेलाइट तस्वीरों के सूक्ष्म अवलोकन से प्रमाणित हुआ कि वर्ष 2019 में विचाराधीन भूमि का भौतिक स्वरूप पहाड़ीनुमा था। इसके बाद के वर्षों की तस्वीरों में पहाड़ी को काटकर उसे समतल करने और वहां निर्माण गतिविधियां संचालित करने के स्पष्ट प्रमाण मिले, जिससे अवैध उत्खनन की पुष्टि हुई।

    इन पर ठोका गया है जुर्माना
    प्रशासनिक आदेश के तहत दंडित होने वालों में सीओडी कॉलोनी निवासी कॉलोनाइजर अभिलाष तिवारी और न्यू शोभापुर निवासी भूमि स्वामी श्रीमती शोभना सिंह, मुकेश सिंह, महेश सिंह, नरेंद्र सिंह, श्रीमती रागिनी सिंह एवं रमेश सिंह शामिल हैं। इन सभी के विरुद्ध संयुक्त रूप से जुर्माना लगाया गया है। पटवारी हल्का नम्बर 02 की खसरा नम्बर 391/13 क एवं अन्य खसरों की कुल 4.24 हेक्टेयर भूमि में से 2.58 हेक्टेयर निजी भूमि पर यह अवैध उत्खनन और कॉलोनी निर्माण का कार्य किया जा रहा था।

    रॉयल्टी चोरी और पर्यावरण क्षतिपूर्ति
    जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि कॉलोनी विकास के लिए पहाड़ी के समतलीकरण से निकली 13 हजार 600 घनमीटर मिट्टी, मुरम और बोल्डर का उपयोग बिना रॉयल्टी चुकाए किया गया। नियमों के अनुसार कमर्शियल प्रोजेक्ट होने के कारण खनिज के उपयोग से पूर्व अग्रिम रॉयल्टी जमा करना अनिवार्य था। प्रशासन ने 6 लाख 80 हजार रुपये की मूल रॉयल्टी का 15 गुना यानी 1 करोड़ 02 लाख रुपये जुर्माना और इतनी ही राशि यानी 1 करोड़ 02 लाख रुपये पर्यावरण क्षतिपूर्ति के रूप में निर्धारित की है।

    …तो होगी कुर्की से होगी वसूली
    कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समयावधि के भीतर अर्थदंड की राशि सरकारी खजाने में जमा नहीं की जाती है, तो बकाया राशि की वसूली के लिए आरआरसी जारी की जाएगी। इसके बावजूद भुगतान में देरी होने पर तहसीलदार के माध्यम से संबंधितों की संपत्ति की कुर्की करने के सख्त निर्देश खनिज अधिकारी को दिए गए हैं। यह पूरी कार्रवाई मध्य प्रदेश खनिज (अवैध खनन, परिवहन तथा भंडारण का निवारण) नियम 2022 के प्रावधानों के तहत सुनिश्चित की गई है।

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