नई दिल्ली। दुबई से तेल अवीव (Dubai to Tel Aviv) जा रही फ्लाईदुबाई की फ्लाइट FZ1073 में कॉकपिट के अंदर हुई हिंसक झड़प और चाकूबाजी (Stabbing incident) के बाद विमान को सऊदी अरब के तबुक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग (Emergency Landing) करानी पड़ी। घटना के दौरान विमान करीब 34,000 फीट की ऊंचाई से तेजी से नीचे आया और महज कुछ समय में करीब 16,600 फीट तक पहुंच गया। इमरजेंसी लैंडिंग के बाद सामने आई तस्वीरों में बोइंग 737 के टेल सेक्शन में भारी टूट-फूट दिखाई दी। रडर और एपीयू के आसपास के पैनल भी क्षतिग्रस्त नजर आए।
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, विमान के तेजी से नीचे आने के दौरान उस पर पड़ने वाला एयरोडायनामिक दबाव टेल सेक्शन के नुकसान की एक संभावित वजह हो सकता है। एयरोडायनामिक दबाव उस बल को कहते हैं, जो हवा की गति और दिशा में बदलाव के कारण किसी चलती वस्तु की सतह पर पड़ता है। विमान के तेज गति से नीचे आने पर उसके अलग-अलग हिस्सों पर हवा का दबाव भी तेजी से बदल सकता है।
हालांकि, FZ1073 के मामले में टेल को नुकसान सिर्फ एयरोडायनामिक दबाव से हुआ या विमान को अचानक और अत्यधिक कोण पर मोड़ने जैसी किसी दूसरी स्थिति का भी इसमें योगदान रहा, इसकी पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।
इमरजेंसी डिसेंट विमान को तेजी से लेकिन नियंत्रित तरीके से कम ऊंचाई पर लाने की प्रक्रिया है। केबिन प्रेशर में अचानक कमी, आग या विमान की किसी गंभीर तकनीकी समस्या जैसी स्थिति में पायलट विमान को जल्द से जल्द ऐसी ऊंचाई पर लाने की कोशिश करते हैं, जहां यात्रियों और क्रू के लिए ऑक्सीजन की स्थिति सुरक्षित हो।
आमतौर पर करीब 10,000 फीट की ऊंचाई को सुरक्षित स्तर माना जाता है, क्योंकि इस ऊंचाई पर वातावरण अपेक्षाकृत अधिक सघन होता है और सामान्य परिस्थितियों में लंबे समय तक अतिरिक्त ऑक्सीजन के बिना सांस लेना संभव होता है।
इमरजेंसी डिसेंट के दौरान विमान को तेजी से नीचे लाने के लिए पायलट कई प्रक्रियाओं का इस्तेमाल करते हैं। इनमें इंजन का थ्रस्ट कम करना और स्पीडब्रेक का इस्तेमाल प्रमुख है।
थ्रस्ट में कमी: पायलट इंजन की शक्ति को आइडल तक कम कर सकते हैं, जिससे विमान को नीचे लाते समय अनावश्यक रूप से अत्यधिक गति पकड़ने से रोका जा सके।
स्पीडब्रेक का इस्तेमाल: विमान के विंग पर मौजूद स्पॉइलर या स्पीडब्रेक हवा के प्रतिरोध को बढ़ाते हैं। इससे विमान को आगे की गति को नियंत्रित रखते हुए तेजी से नीचे लाने में मदद मिलती है। परिस्थितियों के अनुसार विमान की डिसेंट रेट कई हजार फीट प्रति मिनट तक पहुंच सकती है।
FZ1073 में स्थिति सामान्य इमरजेंसी डिसेंट से अलग बताई जा रही है। कॉकपिट में हुई हिंसक झड़प के दौरान विमान का नियंत्रण प्रभावित हुआ और विमान ने बेहद कम समय में हजारों फीट की ऊंचाई खो दी। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 29 सेकंड से दो मिनट के बीच विमान लगभग 17,000 फीट तक नीचे आ गया।
इतनी तेजी से ऊंचाई और विमान की उड़ान स्थिति में बदलाव होने पर उसके ढांचे पर असामान्य एयरोडायनामिक लोड पड़ सकता है। इसी दौरान टेल सेक्शन के रडर और रियर एपीयू के आसपास लगे कंपोजिट पैनल क्षतिग्रस्त होने और स्ट्रक्चरल स्किन में दरारें आने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि, यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि विमान की टेल केवल हवा के दबाव की वजह से टूटी। विमानन सुरक्षा विशेषज्ञों और सऊदी अधिकारियों की तकनीकी जांच से यह स्पष्ट होगा कि नुकसान का वास्तविक कारण क्या था और क्या विमान को अचानक तेज मोड़ या किसी अन्य असामान्य मैन्यूवर से भी अतिरिक्त दबाव झेलना पड़ा।
34,000 फीट से 16,600 फीट तक आने का मतलब है कि विमान ने करीब 17,400 फीट की ऊंचाई गंवाई। यदि यह गिरावट वास्तव में करीब दो मिनट में हुई, तो औसत वर्टिकल डिसेंट रेट लगभग 8,700 फीट प्रति मिनट बैठती है। यह सामान्य क्रूज फ्लाइट की तुलना में बेहद तेज डिसेंट है और बताता है कि उस दौरान विमान सामान्य उड़ान स्थिति में नहीं था।
फिर भी, केवल ऊंचाई घटने के आंकड़े से टेल टूटने का कारण तय नहीं किया जा सकता। इसके लिए फ्लाइट-डेटा रिकॉर्डर, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर, विमान की संरचनात्मक जांच और उस दौरान विमान की गति, कोण तथा नियंत्रण इनपुट का विश्लेषण जरूरी होगा।
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