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इंदौर में 40 साल पुरानी लाइनें सड़ीं, टूटे चेम्बरों का पानी जमीनों में उतरा

January 05, 2026

  • भागीरथपुरा दूषित पानी के मामले में तीन अहम बिन्दुओं पर मंथन
  • अब अफसरों का कहना- पूरा भागीरथपुरा तीनों छोर पर बड़े नाले और कान्ह नदी के हिस्से से घिरा है, केमिकलयुक्त पानी की भी आशंका

इंदौर। भागीरथपुरा में दूषित पानी के बाद अब बोरिंग कनेक्शनों में भी गंदा और दूषित पानी आने के बाद अफसर अलर्ट हो गए हैं। अब कल से वहां नए बिन्दुओं पर जांच शुरू की गई है। इसके तीन प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। 40 साल पुरानी लाइनें सड़ चुकी हैं और वहीं ड्रेनेज के घटिया कार्य हुए, जिसके कारण चेंबर अंदर ही अंदर रिसते रहे, जिससे सीवरेज का पानी जमीनों में उतर गया। अधिकारी एक कारण यह भी मान रहे हैं कि भागीरथपुरा टापूनुमा स्थान पर है और आसपास के तीनों छोर पर नालों की कनेक्टिविटी कई बस्तियों तक है।

भागीरथपुरा की हर गली में सप्लाय किया जा रहा नर्मदा का दूषित पानी हर घर में पहुंचा और लोग बड़ी संख्या में बीमार हुए। मामले में हंगामा मचने के बाद इसकी पड़ताल शुरू हुई। शुरुआती दौर में लाइनों की पड़ताल होती रही, लेकिन अब इसके मूल कारण सामने आ रहे हैं। सालों पहले वहां कई स्थानों पर ड्रेनेज चेंबर बनवाए गए थे, जिनमें बड़े पैमाने पर गड़बडिय़ां की गई थीं और जिसका खामियाजा अब रहवासियों ने भुगता है। कई एक्सपर्ट कहते हैं कि ड्रेनेज चेंबर इतने घटिया बनाए गए कि एक तो नर्मदा लाइनों के ऊपर ही बना दिए गए और दूसरा उसका निर्माण कार्य कुछ ही दिनों में ध्वस्त हो गया और इनके ध्वस्त होने के बाद ओवरफ्लो नहीं हुए, बल्कि उनका पानी जमीनों में रिसता रहा, जिसके कारण पूरे क्षेत्र में कई जगह भूजल ही दूषित हो गया।


  • आज फिर भागीरथपुरा पहुंचे कलेक्टर और निगम कमिश्नर
    आज सुबह फिर कलेक्टर शिवम वर्मा और निगमायुक्त क्षितिज सिंघल अफसरों के साथ भागीरथपुरा क्षेत्र में पहुंचे और सर्वे कर रही टीमों से लेकर वहां तैनात अधिकारियों से बातचीत की और सर्वे कार्य को लेकर टीम बढ़ाने को कहा। अफसरों के मुताबिक पूरे क्षेत्र में मुनादी के लिए टीमें लगाई गई हैं, क्योंकि लोगों को वहां सिर्फ टैंकरों से आया पानी ही पीने के लिए कहा जा रहा है, क्योंकि बोरिंगों का पानी खतरनाक स्थिति में है।

    टैंकरों की संख्या बढ़ाई, गलियों के लिए ट्रैक्टर टैंकर भेजे
    नगर निगम भागीरथपुरा क्षेत्र में 55 से ज्यादा छोटे-बड़े टैंकरों की मदद से नर्मदा का पानी सप्लाय कर रहा है, लेकिन वह भी कम पड़ रहे हैं, क्योंकि उक्त क्षेत्र में पानी सप्लाय किसी अन्य माध्यमों से नहीं हो पा रहा है और लोग अब टैंकरों पर ही आश्रित हैं। कल भी टैंकरों से पानी भरने को लेकर कई गलियों में लोगों की खासी भीड़ रही। वहीं कई बड़े टैंकर भेजे जाने से टैंकर छोटी गलियों में नहीं पहुंच पा रहे थे, जिसके चलते इस मामले की शिकायत अधिकारियों को की गई तो शहर के अन्य स्थानों पर पानी बांटने के लिए लगे सारे छोटे ट्रैक्टर टैंकर वहां से हटाकर भागीरथपुरा भेजे गए हैं। करीब 40 से ज्यादा छोटे ट्रैक्टर-टैंकर आज से क्षेत्र में पानी बांटेंगे और ट्रैक्टर-टैंकरों में कई बड़े टैंकरों से लाया गया पानी भरकर उन्हें भागीरथपुरा रवाना किया जा रहा है।

    1500 से ज्यादा ड्रेनेज चेंबर, अधिकांश ध्वस्त मिले
    निगम की टीम पिछले कुछ दिनों से भागीरथपुरा क्षेत्र में ड्रेनेज चेंबरों की जांच करने में जुटी तो पता चला कि कई चेंबरों की हालत खस्ता हो गई थी और यह वर्षों से ध्वस्त पड़े थे और उनका पानी जमीनों में जाने के साथ-साथ नर्मदा लाइनों के आसपास भरा हुआ था, जिसके कारण पूरा पानी दूषित हुआ और लोग इस पानी को पीकर बीमार हुए। अब ताबड़तोड़ कई चेंबरों को नया बनाने का काम शुरू किया गया है। सालों से इस क्षेत्र में ड्रेनेज लाइन संबंधी कार्य नहीं हुए थे, जिसके कारण वहां चेंबरों और लाइनों की स्थिति ही नहीं पता चल सकी।

    अब नए चेंबर और पूरे क्षेत्र की लाइनें बदलेंगे
    सालों पहले भागीरथपुरा में ड्रेनेज की लाइनें बिछाई गई थीं और साथ ही कई चेंबर बनाए गए थे। इन दोनों की हालत खराब है। अब पूरे क्षेत्र में ड्रेनेज लाइनों के कार्य कराने के साथ-साथ नए चेंबर बनाने के लिए भी अधिकारी सर्वे कर रहे हैं और ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में फिलहाल काम शुरू करा दिए गए हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में लाइनें बदलने के काम आने वाले दिनों में शुरू कराए जाएंगे। इसका पूरा खाका नगर निगम तैयार कर रहा है, जिनमें लाइनों, चेंबरों और कई अन्य कार्यों को लेकर पूरी विस्तृत योजना बन रही है।

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