
इंदौर। बीते साल शहर में सबसे अधिक अपराध वाले थानों में बाणगंगा हमेशा की तरह नंबर वन पर रहा, लेकिन इस बार लसूडिय़ा को पछाडक़र चंदननगर टू नंबर पर आ गया है। वहीं लसूडिय़ा थ्री पर रहा है।
शहर में इस साल 33 हजार से अधिक केस दर्ज हुए हैं, जो पिछले सालों से पांच हजार लगभग अधिक हैं, जो यह बता रहा है कि शहर में अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। हत्या, हत्या के प्रयास, रेप जैसे मामलों में भी वृद्धि हुई है। लेकिन शहर में सबसे अधिक मामले बाणगंगा थाने में दर्ज हुए हैं। गत वर्ष एक साल में बाणगंगा थाने में 1749 केस दर्ज हुए हैं।
इसके बाद चंदननगर थाना रहा। यहां 1663 केस दर्ज हुए हैं। तीसरे नंबर पर लसूडिय़ा थाना रहा। यहां 1640 केस दर्ज हुए हैं। चौथे नंबर पर भंवरकुआं थाना रहा, जहां पिछले साल 1370 केस दर्ज हुए हैं। इसके अलावा विजयनगर में 1020, खजराना में 1041 केस दर्ज हुए हैं। शहर के अपराध में इन पांच-छह थानों का योगदान सबसे अधिक है। 30 प्रतिशत मामले इन थानों में ही दर्ज हुए हैं।
तीन नए थानों को प्रस्ताव कागज पर
कुछ साल पहले अपराधों पर नियंत्रण के लिए पुलिस ने बाणगंगा थाने को तोडक़र सुपर कॉरिडोर थाना, लसूडिय़ा थाने को तोडक़र महालक्ष्मीनगर थाना और भंवरकुआं थाने को तोडक़र पालदा थाना बनाने का प्रस्ताव मुख्यालय को भेज रखा है, लेकिन वह कागजों पर ही है। लेकिन अब चंदननगर थाना अपराध में नंबर दो पर आ गया है, इसके चलते पुलिस कमिश्नर ने हाल ही में कहा है कि इसके लिए भी थाने को तोडक़र एक नए थाने का प्र्रस्ताव बनाया जा रहा है।
दो टीआई का प्रयोग
कुछ दिन पहले पुलिस ने लसूडिय़ा और विजयनगर थाने में अपराधों पर नियंत्रण के लिए दो टीआई का प्रयोग शुरू किया है। यहां दो महिला टीआई को टू आईसी के नाम पर पदस्थ किया गया है, लेकिन इसके बावजूद यहां अपराधों में कोई खास कमी नहीं आई है। अन्य थानों में भी यह प्रयोग किया जाना है।
सराफा में सबसे कम अपराध
सराफा थाना पिछले कुछ सालों से सबसे कम अपराध के लिए जाना जाता है। इस साल भी यहां केवल 155 केस दर्ज हुए हैं। इसके अलावा संवेदनशील थाने छत्रीपुरा, सदर बाजार, पंढरीनाथ में भी काफी कम अपराध दर्ज हुए हैं। कुछ ऐसे थाने हैं, जहां रहवासी क्षेत्र कम है और व्यापारी ज्यादा। जैसे एमजी रोड, कोतवाली, छोटी ग्वालटोली जैसे थानों में भी अपराध कम हुए हैं।
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