
नई दिल्ली । भारत (India) और अमेरिका (America) के बीच व्यापार समझौते (Trade agreements) की घोषणा एक ऐसे समय में हुई है जब भारतीय निर्यातक, विशेष रूप से कपड़ा, चमड़ा और फुटवियर उद्योग भविष्य के ऑर्डर को लेकर गहरे संकट में थे। इस समझौते के बाद अब भारतीय उत्पाद (Indian products) अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाएंगे। सोमवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के साथ बातचीत के बाद इस डील की घोषणा की।
इन प्रमुख उद्योगों पर प्रभाव
कपड़ा और फुटवियर: अब तक छोटे निर्यातक शिपमेंट लगभग बंद कर चुके थे और बड़े खिलाड़ी भारी छूट देकर किसी तरह टिके हुए थे। अब भारतीय गारमेंट्स पर 18% का टैरिफ लगेगा, जो बांग्लादेश या श्रीलंका (20%) की तुलना में कम है।
कालीन: भारतीय कालीन यानी कारपेट अब तुर्की से आने वाले उत्पादों का मजबूती से मुकाबला कर सकेंगे।
रत्न और आभूषण: चीन के उत्पादों पर 34% टैरिफ होने के कारण, अब भारतीय आभूषणों को अमेरिकी बाजार में बढ़त मिलेगी।
समुद्री उत्पाद: अमेरिकी स्टोर्स में अब भारतीय झींगे सहित कई समुद्री उत्पाद सस्ते और अधिक सुलभ होंगे।
आईटी सेक्टर: अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया है। इससे भारतीय आईटी सेवाओं और डिजिटल उत्पादों की लागत कम होगी, जिससे अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी।
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ऑटो पार्ट्स और धातुओं जैसे कुछ क्षेत्रों पर टैरिफ पहले की तरह ही बने रहेंगे। हालांकि अभी भी इस डील को लेकर फुल डिटेल्स आना बाकी है।
निर्यात के आंकड़े और मौजूदा स्थिति
अप्रैल से नवंबर के बीच भारत का अमेरिका को निर्यात 11.3% बढ़कर 59 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका स्मार्टफोन की रही, जिसका निर्यात दोगुना होकर 16.7 अरब डॉलर हो गया।
दिलचस्प बात यह है कि भारत के कुल निर्यात का लगभग 40% हिस्सा (जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा) इन टैरिफ से प्रभावित नहीं था। साथ ही, अगस्त में लागू होने वाली टैरिफ डेडलाइन से बचने के लिए कंपनियों ने पहले ही भारी मात्रा में माल एक्सपोर्ट कर दिया था।
हालांकि उत्साह का माहौल है, लेकिन व्यापार जगत अभी भी पूरी स्पष्टता का इंतजार कर रहा है। वर्तमान में कोई संयुक्त बयान जारी नहीं हुआ है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सोशल मीडिया दावों पर भारतीय अधिकारियों की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया आनी बाकी है।
यूके (UK) और यूरोपीय संघ (EU) के साथ पहले ही व्यापार समझौते कर चुका भारत अब अपने पोर्टफोलियो को विविधता दे सकेगा, जिससे भविष्य में अमेरिकी नीतियों में होने वाले उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम किया जा सके।
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