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बांग्लादेश चुनाव में भारत और अल्पसंख्यक सबसे बड़े मुद्दे, मैनिफेस्टो में क्या कह रहीं प्रमुख पार्टियां?

February 07, 2026

ढाका। शेख हसीना सरकार (Sheikh Hasina ) के पतन के बाद बांग्लादेश में होने जा रहे पहले आम चुनाव (Bangladesh General Election) पर न सिर्फ देश की जनता, बल्कि भारत की भी करीबी नजर है। मुहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के कार्यकाल में भारत-बांग्लादेश संबंधों में आई तल्खी और हिंदुओं सहित अन्य अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की खबरों ने इन चुनावों को और संवेदनशील बना दिया है।

आगामी 12 फरवरी को होने वाले मतदान से पहले प्रमुख राजनीतिक दलों के घोषणापत्र सामने आ चुके हैं। खासतौर पर बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) और जमात-ए-इस्लामी के मैनिफेस्टो में भारत और हिंदू समुदाय को लेकर अपनाए गए रुख पर सबकी निगाहें टिकी हैं।



  • भारत को लेकर पार्टियों की सोच

    17 साल बाद देश लौटे तारिक रहमान ने BNP की कमान संभालते ही “बांग्लादेश फर्स्ट” को अपना मूल मंत्र बताया है। पार्टी का घोषणापत्र भी इसी नीति के इर्द-गिर्द घूमता है। तारिक रहमान का कहना है कि बांग्लादेश न तो किसी देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करेगा और न ही अपने मामलों में दखल स्वीकार करेगा। उनका चर्चित नारा— “न दिल्ली, न पिंडी, पहले बांग्लादेश”—भारत के लिए खास मायने रखता है।

    यह रुख ऐसे समय सामने आया है जब यूनुस सरकार के दौरान बांग्लादेश की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकियों को लेकर सवाल उठे थे। माना जा रहा है कि तारिक रहमान इस दिशा में अलग संतुलन साधने की कोशिश कर रहे हैं।

    दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी ने अपने घोषणापत्र में भारत के साथ शांतिपूर्ण, मित्रवत और सहयोगी संबंधों की वकालत की है। चौंकाने वाली बात यह है कि पार्टी के दस्तावेज़ में पाकिस्तान का कोई उल्लेख नहीं है। हालांकि जमात ने मुस्लिम देशों को प्राथमिकता देने की बात कही है और अमेरिका, यूरोपीय संघ, जापान व कनाडा जैसे पश्चिमी देशों से भी रिश्ते मजबूत करने का संकेत दिया है।

    हिंदुओं और अल्पसंख्यकों पर क्या वादे?

    हिंदुओं की सुरक्षा इस चुनाव का एक अहम मुद्दा बन चुकी है। BNP ने अपने घोषणापत्र में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की जान, संपत्ति और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लागू करने का वादा किया है। इसके अलावा सभी धर्मों के धार्मिक नेताओं के लिए भत्ते और कल्याणकारी योजनाओं की भी बात कही गई है।

    वहीं जमात-ए-इस्लामी ने हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट और ठोस वादा नहीं किया है। पार्टी ने केवल धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को प्रतिनिधित्व देने की बात अपने मैनिफेस्टो में शामिल की है।

    कुल मिलाकर, इस चुनाव में भारत से रिश्ते और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा ऐसे मुद्दे हैं, जो बांग्लादेश की आने वाली राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

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