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भारत आतंकवाद के खिलाफ रखता है ‘जीरो टॉलरेंस’ – रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

April 02, 2026


नई दिल्ली । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Defence Minister Rajnath Singh) ने कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ रखता है (India has ‘Zero Tolerance’ against Terrorism) ।


  • रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को तिरुवनंतपुरम में आयोजित ‘सैनिक सम्मान सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए कहा कि आज का भारत आतंकवाद के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ रखता है। वह इसके खिलाफ सरहद के इस पार और उस पार दोनों तरफ कार्रवाई करता है। उन्होंने कहा कि चाहे ‘उरी अटैक’ के बाद हुई सर्जिकल स्ट्राइक हो, ‘पुलवामा’ के बाद की गई एयर स्ट्राइक हो या फिर अभी ‘पहलगाम’ की घटना के बाद किया गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ हो, हमने आतंकवाद के खिलाफ जबरदस्त प्रहार किया है। राजनाथ सिंह ने कहा कि पहलगाम में हुई आतंकी घटना के बाद भारतीय सैनिकों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान को महज 22 मिनट में घुटनों पर ला दिया था। भारतीय सैन्य इतिहास में आतंकवाद के खिलाफ किया गया, अब तक का यह सबसे बड़ा ऑपरेशन था। यह ऑपरेशन अभी तक बंद नहीं हुआ है। यदि कोई भी गलत हरकत सरहद पार से हुई, तो उसका मुंहतोड़ जवाब ही नहीं दिया जाएगा, बल्कि अभूतपूर्व कार्रवाई होगी।

    राजनाथ सिंह ने कहा कि आज जिस तरह से समुद्री डोमेन की महत्ता बढ़ रही है, उसे ध्यान में रखते हुए हम अपने प्राचीन विजडम और आधुनिक टेक्नोलॉजी, दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ रहे हैं, क्योंकि हम 2047 तक भारत की नेवी को दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे ताकतवर नेवी बनाना चाहते हैं। आज के समय में समुद्री डोमेन, केवल व्यापार मार्ग या नौसैनिक शक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह आर्थिक विकास, तकनीकी नवाचार और रणनीतिक स्वायत्तता का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। आज भारत शिप शिपबिल्डिंग में दुनिया की किसी भी बड़ी शक्ति से कम नहीं है। इसी केरल में मौजूद कोचीन शिपयार्ड में भारत का सबसे पहला स्वदेशी रूप से विकसित एयरक्राफ्ट कैरियर बन कर तैयार हुआ।

    उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का यह मानना है कि हमारे सैनिक और पूर्व सैनिक देश के मजबूत स्तंभ हैं। उनकी देखभाल करना, हमारा नैतिक कर्तव्य है। हमारी सरकार ने अपने पूर्व सैनिकों के लिए, बीते वर्षों में कई ठोस फैसले लिए हैं और आने वाले समय में भी यह सिलसिला नहीं रुकेगा। लंबे समय से चली आ रही, ‘वन रैंक वन पेंशन’ की मांग को, सरकार ने पूरी ईमानदारी से लागू किया।

    उन्होंने मेजर संदीप उन्नीकृष्णन का स्मरण करते हुए कहा, “कौन भूल सकता है, मेजर संदीप उन्नीकृष्णन, अशोक चक्र पुरस्कार विजेता के सर्वोच्च बलिदान को। ‘मुंबई टेरर अटैक’ के दौरान उन्होंने आतंकवादियों से लड़ते हुए अपनी जान दे    दी। यह देश का दुर्भाग्य था कि उस समय की कांग्रेस सरकार ने मेजर संदीप उन्नीकृष्णन के बलिदान का उचित सम्मान नहीं किया।” राजनाथ सिंह ने कहा कि आज हम देश के अलग-अलग हिस्सों में भी वॉर मेमोरियल बना रहे हैं ताकि देश की अगली पीढ़ी को प्रेरणा मिले कि हमारे सैनिकों ने देश की रक्षा के लिए क्या काम किया है।

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