
नई दिल्ली। नेपाल (Nepal) में भोटेकोशी नदी (Bhotekoshi River) में आई विनाशकारी बाढ़ (flood) के बाद राहत और बचाव कार्य जारी है। इस आपदा में अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। संकट की इस घड़ी में भारत (India) समेत कई देशों ने नेपाल को राहत और रेस्क्यू टीम भेजने की पेशकश की थी, लेकिन नेपाल सरकार ने फिलहाल विदेशी बचाव दलों को बुलाने से इनकार कर दिया है। नेपाल का कहना है कि उसके अपने सुरक्षा बल राहत और बचाव अभियान चलाने में सक्षम हैं और इस समय उसे जमीनी टीमों के बजाय वित्तीय सहायता की जरूरत है।
नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, भारत, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, दक्षिण कोरिया, श्रीलंका और बांग्लादेश सहित कई देशों ने विशेषज्ञ आपदा राहत दल भेजने की पेशकश की थी। भारत ने भी एनडीआरएफ की टीम तैनात करने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि, नेपाली सेना और पुलिस की सलाह पर सरकार ने इन प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया।
2015 के अनुभव से लिया फैसला
नेपाल सरकार के इस फैसले के पीछे 2015 में आए विनाशकारी भूकंप का अनुभव भी अहम माना जा रहा है। उस दौरान बड़ी संख्या में विदेशी राहत और बचाव दल नेपाल पहुंचे थे। इससे राहत कार्यों के समन्वय और प्रबंधन में काफी दिक्कतें सामने आई थीं। इसी अनुभव को देखते हुए इस बार नेपाल अपने सुरक्षा बलों के जरिए ही अभियान चलाने पर जोर दे रहा है।
लापता विदेशी नागरिकों के लिए बनाई आपात टीम
नेपाल पुलिस और विभिन्न देशों के दूतावासों के आंकड़ों के मुताबिक, बाढ़ के बाद स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है। नेपाल में फंसे विदेशी नागरिकों की मदद और उनके परिजनों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए विदेश मंत्रालय ने एक आपातकालीन प्रतिक्रिया टीम गठित की है। उप-सचिव स्तर के एक अधिकारी को रसुवा के तिमुरे स्थित ग्राउंड ऑपरेशन्स टीम में भेजा गया है।
यह टीम सुरक्षा बलों के साथ समन्वय कर संबंधित दूतावासों और परिवारों को लापता लोगों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराएगी। विदेश मंत्री शिसिर खनल ने भी संबंधित विभागों को दूसरे देशों की सरकारों के साथ लगातार संपर्क में रहने के निर्देश दिए हैं।
भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री
विदेशी रेस्क्यू टीमों को अनुमति नहीं मिलने के बावजूद नेपाल ने मानवीय और आर्थिक सहायता का स्वागत किया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, भारत अब तक नेपाल को 47.5 टन राहत सामग्री भेज चुका है। इसके साथ ही भारत ने बेली ब्रिज और प्रीफैब ट्रस ब्रिज उपलब्ध कराने की पेशकश भी की है, ताकि बाढ़ से क्षतिग्रस्त संपर्क व्यवस्था को बहाल करने में मदद मिल सके।
भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन और विश्व बैंक ने भी नेपाल के लिए आर्थिक सहायता का ऐलान किया है। एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) के अध्यक्ष मासातो कांडा ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बातचीत कर पुनर्निर्माण और अर्ली वार्निंग सिस्टम को मजबूत करने में सहयोग का भरोसा दिया है।
नेपाल ने अपने दूतावासों को निर्देश दिया है कि विदेशों से मिलने वाली किसी भी वित्तीय सहायता को केवल प्रधानमंत्री राहत कोष के माध्यम से स्वीकार किया जाए।
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