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भोपाल के हवाले इंदौर की गाइडलाइन, 2606 स्थानों पर बढ़ेगी स्टाम्प ड्यूटी

March 25, 2026

1 अप्रैल से महंगी हो जाएगी रजिस्ट्री, अधिकांश आपत्तियों का किया निराकरण, अब कोर्ट जाने और विरोध दर्ज करवाने की दी प्रभावितों ने चेतावनी

इंदौर। 1 अप्रैल से लागू होने वाली इंदौर (Indore) की गाइडलाइन (Guidelines) को लेकर कल जिला मूल्यांकन समिति की बैठक कलेक्टर (Collector) की अध्यक्षता में हुई, जिसमें प्राप्त 267 आपत्तियों के निराकरण का दावा किया गया और कुछ संशोधन भी मान्य हुए। अब इंदौर की गाइडलाइन भोपाल (Bhopal) की केन्द्रीय मूल्यांकन समिति के हवाले की गई है, जहां से मंजूरी के बाद 1 अप्रैल से इसे लागू किया जाएगा। जो दर वृद्धि प्रस्तावित की गई है उसके मुताबिक 2606 स्थानों पर स्टाम्प ड्यूटी बढ़ जाएगी। यानी नए वित्त वर्ष में रजिस्ट्री करवाना और महंगा पड़ेगा। दूसरी तरफ क्रेडाई सहित अन्य आपत्तिकर्ताओं का कहना है कि शासन के समक्ष विरोध दर्ज करवाने के साथ कोर्ट जाने का रास्ता भी खुला हुआ है, क्योंकि गाइडलाइन की विसंगतियां दूर नहीं की गई।


  • गाइडलाइन के साथ जो उपबंध रहते हैं उनमें बदलाव के अधिकार चूंकि शासन स्तर के हैं। लिहाजा समिति ने अपनी अनुशंसा के साथ उन्हें भोपाल भेजने का निर्णय लिया है। इस तरह के 11 सुझाव शासन को भेजे गए हैं। वरिष्ठ जिला पंजीयक मंजुलता पटेल का कहना है कि छंटनी के बाद जो 267 आपत्तियां मिली थीं। उनका युक्तियुक्त तरीके से समाधान करने के प्रयास किए गए और जिन क्षेत्रों में इस वित्त वर्ष में अधिक रजिस्ट्रियां या गाइडलाइन से ज्यादा दर पर हुईं, उनमें दर वृद्धि प्रस्तावित की गई है। इस बार शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक दर वृद्धि के प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, क्योंकि 29 गांवों के अलावा प्रस्तावित मास्टर प्लान में जो 79 गांव हैं, उनमें भी धारा 20 के अलावा पुरानी अनुमतियों के आधार पर कई कॉलोनियां, टाउनशिप, बिल्डिंगें और रियल इस्टेट के प्रोजेक्ट अमल में आ रहे हैं, जिसके चलते इन क्षेत्रों में ही अधिक खरीद-फरोख्त देखी गई है। वर्तमान में इंदौर जिले में 4840 स्थानों पर गाइडलाइन लागू है। इनमें से 2606 स्थानों पर दर वृद्धि के प्रस्ताव बैठक में मंजूरी के बाद भोपाल भेजे जा रहे हैं। केन्द्रीय मूल्यांकन समिति ही इंदौर सहित सभी जिलों से प्राप्त प्रस्तावों के आधार पर आगामी वित्त वर्ष की गाइडलाइन को मंजूरी देगी, जो 1 अप्रैल से लागू हो जाएगी। इंदौर के कईक्षेत्र ऐसे हैं, जहां पर 200 प्रतिशत से अधिक गाइडलाइन बढ़ा दी गई है। वहीं कई कॉलोनाइजरों के साथ-साथ किसानों ने भी दर वृद्धि की मांग की है, क्योंकि अभी भी बाजार मूल्य और गाइडलाइन के रेट में अंतर है। हालांकि रियल इस्टेट से जुड़े सभी लोगों को कहना है कि शासन गाइडलाइन भले ही बढ़ा दे, मगर कम से कम स्टाम्प ड्यूटी तो हटाए, जो कि पूरे देश में सबसे अधिक साढ़े 12 प्रतिशत इंदौर सहित प्रदेश में वसूल की जा रही है। जबकि अन्य राज्यों में यह 5 से 7 प्रतिशत तक ही है। क्रेडाई के चेयरमैन संदीप श्रीवास्तव का भी कहना है कि लगातार स्टाम्प ड्यूटी घटाने की मांग शासन से की जाती रही है। देश के ख्यातनाम रियल इस्टेट कारोबारी भी इस बात पर आश्चर्य प्रकट करते हैं कि सर्वाधिक साढ़े 12 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी मध्यप्रदेश सरकार वसूल कर रही है। दूसरी तरफ पंजीयन विभाग से जुड़े अभिभाषक प्रमोद द्विवेदी का कहना है कि कुछ मॉल मालिकों, कालोनाइजरों के इशारों पर अवैध तरीके से भी गाइडलाइन घटाने-बढ़ाने का काम किया गया है। जरूरत पड़ी तो कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया जाएगा और गाइडलाइन की विसंगतियों को जनता के समक्ष भी रखेंगे, जिसमें उसकी विसंगतियां उजागर होंगी।

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