
इंदौर। भागीरथपुरा कांड को एक महीना होने आया, मगर अभी तक लीकेज से लेकर मरीजों के मिलने का सिलसिला खत्म ही नहीं हुआ। दूसरी तरफ एक और बड़ा सच यह भी सामने आया कि शासन से आए पत्र के चलते निगम के अफसरों ने 200 से अधिक वार्डों की पेयजल, ड्रैनेज, सडक़ निर्माण सहित अन्य फाइलें मंजूरी से रोकी। आयुक्त नगरीय प्रशासन और विकास विभाग द्वारा भेजे गए दिशा-निर्देश में स्पष्ट कहा गया कि जो नया एसओआर शासन द्वारा तैयार किया जा रहा है उसी के मुताबिक टेंडर तैयार किए जाएं। इसके चलते भागीरथपुरा की भी कई फाइलें रूकी और कई काम चूंकि अमृत-2.0 के तहत होना थे, लिहाजा डुप्लीकेसी के चलते भी रोकना पड़े। अब भागीरथपुरा के साथ अन्य वार्डों के ऐसे ही कार्यों की फाइलें फटाफट मंजूर की जा रही है। शासन ने अभी सिर्फ सडक़ निर्माण से संबंधित नया एसओआर यानी शेड्यूल ऑफ रेट भिजवाया है।
भागीरथपुरा कांड में किसकी जिम्मेदारी तय हो, यह सवाल अभी भी बना हुआ है। हालांकि मचे बवाल के चलते शासन ने तत्कालीन निगमायुक्त को हटाने के साथ अपर आयुक्त को निलंबित करने के अलावा अन्य पर भी गाज गिराई। मगर जनप्रतिनिधि साफ बच निकले। पार्टी स्तर पर सिर्फ पूछताछ ही की गई। नोटिस थमाने से लेकर अन्य कोई कार्रवाई फिलहाल नजर नहीं आई। दूसरी तरफ 24 मौतों के साथ भागीरथपुरा कांड ने देश-दुनिया में इंदौर की छवि को धूमिल अलग कर डाला। एक और महत्वपूर्ण जानकारी यह भी सामने आई कि नगरीय प्रशासन और विकास विभाग के आयुक्त संकेत भोंडवे के निर्देश पर सभी निगमायुक्तों और नगर पालिकाओं को प्रमुख अभियंता प्रदीप एस. मिश्रा का दो पेज का आदेश भिजवाया गया, जिसमें सडक़ निर्माण कार्यों की योजना नए आईएसएसआर के तहत बनाने को कहा गया।
सडक़ निर्माण में ही चूंकि फुटपाथ, साइकल ट्रैक, ड्रैनेज सहित जंक्शन डिजाइन सहित अन्य कार्य आते हैं। 27 सितम्बर 2025 को भेजे गए इस आदेश के चलते ही 200 से अधिक तमाम वार्डों की फाइलों की मंजूरी रोकी गई, जिसमें भागीरथपुरा में होने वाले जनकार्य, जल यंत्रालय, ड्रैनेज से जुड़े काम भी शामिल थे। सूत्रों का यह भी कहना है कि जब एसीएस संजय दुबे इंदौर आए थे और भागीरथपुरा मामले की जांच की, तब उनके सामने भी नए एसओआर का यह मामला उठा और उन्होंने भी इस पर कड़ी नाराजगी जाहिर की, जिसके चलते दूषित पानी से 500 से अधिक लोग बीमार हुए और 24 मौतें हो गईं। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने भी इस मामले में नए एसओआर की गलत व्याख्या कर वर्क ऑर्डर जारी ना करने की शिकायत आयुक्त से की भी थी। निगम के जनकार्य समिति प्रभारी राजेन्द्र राठौर का कहना है कि यह सच है कि नए एसओआर के चलते वार्डों की फाइलों को मंजूरी नहीं मिली और अभी सिर्फ सडक़ से संबंधित ही नया एसओआर जारी हुआ है। जल यंत्रालय और अन्य विभागों के लिए अभी पुराने एसओआर के आधार पर ही कार्य मंजूर किए जा रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में कायदे से भोपाल बैठे आयुक्त श्री भोंडवे के खिलाफ भी कार्रवाई होना चाहिए। जबकि अधिनस्थ अधिकारियों को बलि का बकरा बनना पड़ा। भागीरथपुरा का हल्ला मचने के चलते अब जहां फटाफट काम शुरू करवाए गए, तो टेंडर मंजूरी के साथ फाइलें भी दौडऩे लगीं। सिर्फ इंदौर निगम ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सभी नगरीय निकाय एसओआर के चक्कर में उलझे पड़े रहे।
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