
इंदौर। कालका माता मंदिर परिसर में हुई कथित घटना की जांच को लेकर बजरंग सेना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी) लसूड़िया को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने मामले में निष्पक्ष अग्रिम विवेचना, नए विवेचक की नियुक्ति तथा भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आर्म्स एक्ट की प्रासंगिक धाराएं जोड़ने की मांग की है। ज्ञापन में बजरंग सेना ने आरोप लगाया कि 10 अक्टूबर की रात कालका माता मंदिर परिसर में नवरात्रि की तैयारियों के दौरान कुछ असामाजिक तत्व मंदिर पहुंचे और वहां अभद्रता, गाली-गलौज तथा महिलाओं के साथ अशोभनीय व्यवहार किया।
विरोध किए जाने पर बड़ी संख्या में लोग कथित रूप से हथियारों के साथ मौके पर एकत्र हो गए, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति बन गई। संगठन का कहना है कि पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना देने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक कई आरोपी फरार हो चुके थे।संगठन ने आरोप लगाया कि घटना की गंभीरता के बावजूद थाना लसूड़िया में दर्ज एफआईआर में केवल सामान्य धाराएं लगाई गईं, जबकि महिलाओं के साथ अभद्रता, हथियारबंद भीड़, गैरकानूनी जमावड़ा और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोपों के अनुरूप धाराएं शामिल नहीं की गईं।ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग समय रहते सुरक्षित नहीं कराई गई, जिसके कारण महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट हो गए।
बजरंग सेना ने इस पूरे पहलू की भी स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।संगठन ने विवेचना अधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नए विवेचक की नियुक्ति, भारतीय न्याय संहिता की अन्य प्रासंगिक धाराएं तथा आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई करने की मांग की है। साथ ही दोषियों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई कर पूरे प्रकरण की पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया। बजरंग सेना का कहना है कि यदि मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होती है तो आम जनता का पुलिस एवं न्याय व्यवस्था पर विश्वास और अधिक मजबूत होगा। संगठन ने पुलिस प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाने की मांग की है।
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