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इंदौर-भोपाल का मेट्रोपॉलिटन एरिया तय, सर्वे रिपोर्ट शासन को भेजी

March 25, 2026

विभागीय मंत्री की मंजूरी के बाद नोटिफिकेशन की प्रक्रियाहोगी, नियोजन क्षेत्र के बाहर काम करेगी अथॉरिटी, प्राधिकरण-निगम के अधिकार क्षेत्र में नहीं होगा बदलाव

इंदौर। मास्टरप्लान (master plan) के भले ही अते-पते ना हो मेट्रोपॉलिटन एरिया (Metropolitan Area) को उसके पहले लागू करने का दावा शासन करता रहा है। अब इंदौर (Indore) के साथ भोपाल (Bhopal) का मेट्रो पॉलिटन एरिया भी संशोधन के बाद तय कर दिया है, जिसे नगरीय प्रशासन और विकास मंत्रालय के हवाले किया गया है। विभागीय मंत्री की मंजूरी के बाद नोटिफिकेशन की प्रक्रियामंत्रालय द्वारा शुरू की जाएगी। शासन ने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय नगरीय निकायों, प्राधिकरणों, पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में कोई परिवर्तन नहीं होगा और अथॉरिटी नियोजन क्षेत्र के बाहर काम करेगी। इंदौर मेट्रोपॉलिटन एरिया को भी चार बार बढ़ाया गया और अब साढ़े 14 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र में इसे लागू किया जा रहा है, जिसमें इंदौर के साथ धार, रतलाम, नागदा, बदनावर, शाजापुर, मक्सी तक के क्षेत्र शामिल रहेंगे।


  • पिछले दिनों प्राधिकरण में भी बढ़े हुए क्षेत्र को लेकर बैठक हुई। दरअसल, मेहता एंड एसोसिएट को ही इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई है। मगर तीन बार शासन ने पहले संशोधन किया और चौथी बार में रतलाम, शाजापुर की तहसीलें भी जोड़ दी गई, जिसके चलते इंदौर मेट्रो पॉलिटन रीजन का एरिया साढ़े 4 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक और बढ़ गया। नतीजतन 14550.29 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्रफल शामिल किया गया। दूसरी तरफ भोपाल का भी एरिया 12 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक हो गया है, जिसमें राजधानी के अलावा नर्मदापुरम, सीहोर, विदिशा, राजगढ़-ब्यावरा के एरिया को भी शामिल किया गया है। अब दोनों अथॉरिटी का एरिया तय होने के बाद अब अनुमोदन की प्रक्रिया की जाएगी और तत्पश्चात नगरीय प्रशासन और विकास मंत्रालय द्वारा नोटिफिकेशन जारी करवाया जाएगा, जिस पर दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के बाद आगे की कार्रवाई होगी। कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दे दी है और साथ ही इंदौर-भोपाल की तरह ही ग्वालियर और जबलपुर में भी मेट्रोपॉलिटन एरिया घोषित करने का निर्णय लिया। इसके साथ ही विभाग ने यह भी स्पष्ट किया कि मेट्रोपॉलिटन के चलते जो स्थानीय निकाय, पंचायत और प्राधिकरण हैं, उनके अधिकारों में कोई परिवर्तन नहीं होगा। पहले की तरह ही राजस्व वसूली, भवन निर्माण अनुमति सहित अन्य नियोजन क्षेत्र के होने वाले काम उन्हीं विभागों के द्वारा होंगे। सिर्फ नियोजन क्षेत्र से बाहर ही अथॉरिटी काम करेगी। इसकी प्लानिंग कमेटी में 45 सदस्य होंगे, जिसमें से 30 निर्वाचन जनप्रतिनिधि और 15 पदेन यानी अफसरों से लेकर विशेषज्ञों को लिया जाएगा। अथॉरिटी बड़े प्रोजेक्टों के लिए लैंड पूलिंग सहित अधिग्रहण से जुड़े काम भी कर सकेगी। अथॉरिटी के अध्यक्ष मुख्यमंत्री रहेंगे और तीन उपाध्यक्ष मंत्री होंगे। मुख्य सचिव के साथ 7 विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव या प्रमुख सचिव भी इस कमेटी का हिस्सा रहेंगे। यह भी उल्लेखनीय है कि इंदौर मेट्रो पॉलिटन का एरिया चार बार संशोधित किया गया और अब 14550.29 वर्ग किलोमीटर का एरिया तय किया गया है। इसमें पूरा इंदौर जिला तो शामिल है ही, वहीं उज्जैन, देवास, शाजापुर के बाद रतलाम की भी कुछ तहसीलें शामिल की गई और इन जिलों के भी क्षेत्रफल बढ़ाए गए। अब आधा दर्जन जिलों की 35 तहसीलें इसमें शामिल की गई है, जिसके चलते नए सिरे से प्लानिंग करना पड़ी। इंदौर विकास प्राधिकरण को ही इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई।

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