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इंदौर: 200 करोड़ की सीलिंग जमीन कराई मुक्त

April 08, 2026

कलेक्टर के निर्देश पर एसडीएम जूनी इंदौर ने जमीन ली कब्जे में, नायब तहसीलदार ने जारी किया था बेदखली आदेश
40 साल से कर रखा था कब्जा, मैरिज हॉल सहित अन्य निर्माणों पर चले बुलडोजर

इंदौर। चोइथराम हॉस्पिटल (Choithram Hospital) के सामने पीपल्याराव (Piplyarao) की सीलिंग (Ceiling) की लगभग 200 करोड़ रुपए ( ₹200 Crore) की जमीन (Land ) आज सुबह प्रशासन ने अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर बुलडोजर चलवाकर मुक्त करवाई। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर जूनी इंदौर एसडीएम घनश्याम धनगर ने मौके पर पहुंचकर उक्त कार्रवाई करवाई, जिसमें पुलिस, प्रशासन, निगम का अमला भी मौजूद रहा। नायब तहसीलदार ने पिछले दिनों ही बेदखली के आदेश जारी किए थे और 50 हजार रुपए के अर्थदण्ड को भी आरोपित किया था। लगभग 2 लाख स्क्वेयर फीट जमीन पर 40 सालों से खुशबीर सिंह पिता दलजीत सिंह ने कब्जा कर रखा था।


  • पीपल्याराव के सर्वे नम्बर 19/1, 20/1, 21/1 और 22/2 की कुल रकबा 1.784 हेक्टेयर यानी लगभग 2 लाख स्क्वेयर फीट जमीन सरकारी घोषित है और 16 जून 2025 को भी 7 दिन में अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया गया था। इसके बाद भी अतिक्रमण ना हटने पर अंतिम सूचना-पत्र 23 मार्च 2026 को नायब तहसीलदार ने जारी किया, जिसमें 3 दिन में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। बावजूद इसके अतिक्रामक कुशबीर सिंह अतिक्रमण भी नहीं हटाया और कब्जा भी नहीं छोड़ा। इसके चलते कलेक्टर वर्मा के निर्देश पर एसडीएम धनगर ने पुलिस बल और बुलडोजर की सहायता से यहाँ निर्मित मैरिज हॉल सहित कुछ अन्य निर्माण, झुग्गी-झोपड़ी भी हटाई। इस जमीन की कीमत 200 करोड़ रुपए के लगभग है, क्योंकि 2 लाख स्क्वेयर फीट जमीन चोइथराम के सामने मौजूद है और अगर न्यूनतम 10 हजार रुपए स्क्वेयर फीट के रेट से भी गणना की जाए तो जमीन की कीमत 200 करोड़ रुपए तक पहुंच जाती है। उल्लेखनीय है कि पीपल्यापाला में काफी जमीन ग्रीन बेल्ट यानी हरियाली के लिए भी आरक्षित है, जहां पर बड़ी संख्या में मैरिज गार्डन, अवैध कॉलोनी के साथ-साथ रसूखदारों ने अवैध कब्जे कर रखे हैं। यह भी आश्चर्य का विषय है, जो जमीन प्रशासन ने आज मुक्त कराई, उस पर 40 साल से अवैध कब्जा बताया गया और यह बात नायब तहसीलदार द्वारा दिए गए नोटिस में भी कही गई है। यानी इतने वर्षों तक प्रशासन इस बेशकीमती जमीन को मुक्त कराने में असफल रहा और आज समय सीमा खत्म होने के बाद उक्त कार्रवाई की गई। दरअसल कुछ समय पूर्व जूनी इंदौर एसडीएम घनश्याम धनगर इस क्षेत्र में बसी एक ग्रीन बेल्ट की जमीन की जांच करने पहुंचे थे, जिसमें यह जमीन भी नजर आई। जब पटवारी और राजस्व निरीक्षकों से जांच करवाई तो पता चला कि उक्त 1.78 हेक्टेयर जमीन शहरी सीलिंग प्रभावित होकर सरकारी है। इसके चलते एसडीएम द्वारा कब्जाधारियों को नोटिस जारी करवाकर दस्तावेज मांगे गए। मगर मालिकाना हक के कोई दस्तावेज नहीं मिले, जिसके चलते उक्त जमीन पर आज बुलडोजर चलवाकर प्रशासन ने अपना कब्जा हासिल किया और यहां पर इस आशय का सूचना बोर्ड भी लगवाया जा रहा है कि उक्त जमीन सरकारी है। यह भी उल्लेखनीय है कि इसी क्षेत्र पिपलियाराव में 1.874 हेक्टेयर सिटी पार्क की जमीन को भी आवासीय करवाने के प्रयास रसूखदारों द्वारा किए जा रहे हैं, जिसमें हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जैन परिवार ने याचिकाएं दायर कर रखी है और अभी दो दिन पहले इस मामले में नगरीय प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय दुबे की पेशी भी हुई। नगर तथा ग्राम निवेश की धारा 23ए के तहत भी इस मामले में भू-उपयोग परिवर्तन की कार्रवाई शुरू की गई और अग्रिबाण ने इस मामले में कई तथ्य उजागर किए, जिसके चलते शासन अभी तक भू-उपयोग परिवर्तन का निर्णय नहीं ले सका। नतीजतन जमीन मालिक अवमानना की कार्रवाई के लिए पहुंच गए। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा है कि शासकीय भूमि पर अतिक्रमण किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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