
इंदौर: मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर (Indore) का भागीरथपुरा (Bhagirathapura) क्षेत्र इन दिनों मातम और डर के साये में है। दूषित पानी पीने से हुई 20 अकाल मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। इंदौर हाईकोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त नाराजगी जाहिर करते हुए इसे ‘अपराधजनक उदासीनता’ करार दिया है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी: ‘मौत के मुहाने पर खड़ा किया’
मामले की सुनवाई के दौरान माननीय उच्च न्यायालय ने नगर निगम और प्रशासन को आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं है, बल्कि एक ऐसी उदासीनता है जिसने निर्दोष नागरिकों को मौत के मुहाने पर धकेल दिया। इस मामले में अब तक चार जनहित याचिकाएं (PIL) दायर की जा चुकी हैं।
सनसनीखेज खुलासा
2022 में पास हुआ था ठेका, फिर भी नहीं बदली पाइपलाइन। सीनियर एडवोकेट अजय बागड़िया ने याचिका के माध्यम से कई चौंकाने वाले तथ्य सामने रखे हैं।
दबा दी गई फाइल: नवंबर 2022 में इंदौर नगर निगम की मेयर-इन-काउंसिल (MIC) ने सवा दो करोड़ रुपये की लागत से नई पाइपलाइन बिछाने का ठेका ‘मालवा इंजीनियरिंग’ को दिया था।
हस्ताक्षर के बाद भी काम बंद: मेयर और वरिष्ठ अधिकारियों की मंजूरी के बावजूद इस प्रोजेक्ट पर जमीन पर कोई काम नहीं हुआ।
पुरानी चेतावनियों को किया नजरअंदाज: साल 2017-18 में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इंदौर के 7 स्थानों से पानी के सैंपल लिए थे, जो जांच में फेल पाए गए थे। इसकी रिपोर्ट निगम को दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
“अगर समय रहते पाइपलाइन बदल दी जाती, तो आज हमें इतनी लाशें नहीं गिननी पड़तीं। यह जनता को जानबूझकर जहर पिलाने जैसा कृत्य है।” – अजय बागड़िया, सीनियर एडवोकेट
प्रमुख कानूनी मांगें और धाराएं
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से इस मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की है:
रिटायर्ड जज से जांच: घटना की निष्पक्ष जांच के लिए हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में ‘हाई-पावर कमेटी’ का गठन हो।
हत्या का मुकदमा: दोषी निगम अधिकारियों और ठेकेदारों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) या पूर्ववर्ती IPC की धारा 302 (हत्या) के तहत मुकदमा चलाने की मांग की गई है।
मुआवजा: मृतकों के परिजनों और बीमारों के लिए उचित आर्थिक सहायता।
महत्वपूर्ण कानूनी प्रावधान (Legal Provisions)
इस मामले में अधिवक्ता द्वारा मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया जा रहा है:
अनुच्छेद 21 (Article 21): जीवन का अधिकार, जिसमें स्वच्छ जल और स्वास्थ्य का अधिकार शामिल है।
धारा 304-A: लापरवाही के कारण मृत्यु (हालाँकि अधिवक्ता इसे धारा 302 के तहत ‘गंभीर अपराध’ मान रहे हैं)।
धारा 277: सार्वजनिक जल स्रोत या जलाशय के पानी को दूषित करना।
अगली सुनवाई 14 जनवरी को
कोर्ट ने पहले ही साफ पानी की आपूर्ति और प्रभावित क्षेत्र में तत्काल स्वास्थ्य शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 14 जनवरी को होनी है, जिसमें नगर निगम को अपना पक्ष रखना होगा और जवाबदेही तय की जाएगी।
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