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इंदौर: कलेक्टर पर बरसे जीतू पटवारी, दी सीधी चेतावनी- “आप भाजपा कार्यकर्ता नहीं, प्रशासनिक अधिकारी हैं”

January 08, 2026

इंदौर। मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर प्रशासनिक अधिकारियों (Administrative Officers) की निष्पक्षता को लेकर घमासान शुरू हो गया है। हाल ही में इंदौर (Indore) कलेक्टर शिवम वर्मा और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के देर रात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय पहुंचने की खबर ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। इस मामले पर मध्य प्रदेश कांग्रेस (Congress) कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jitu Patwari) ने तीखा हमला बोला है।

जानकारी के अनुसार, इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी पीने से हुई मौतों के मामले के बीच, कलेक्टर और महापौर ने संघ कार्यालय जाकर मालवा प्रांत के प्रचारक राजमोहन के साथ करीब डेढ़ घंटे तक चर्चा की। जैसे ही यह बात सार्वजनिक हुई, कांग्रेस ने इसे “प्रशासन का भगवाकरण” करार दिया।

वीडियो में जीतू पटवारी बेहद आक्रामक अंदाज में नजर आ रहे हैं। उन्होंने कलेक्टर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा: “कलेक्टर साहब, आपसे आग्रह है कि अगर आप राजनीतिक दलों के दफ्तरों में जाकर अपनी ड्यूटी करेंगे, तो याद रखना कि कांग्रेस का कार्यकर्ता आपके काम करने की शैली को ठीक करना जानता है। आप भाजपा कार्यकर्ता के तौर पर कार्यालय कैसे जा सकते हैं?”


  • पटवारी ने आगे कहा कि यदि प्रशासन को चर्चा करनी है, तो उन्हें मुख्य सचिव, वरिष्ठ अधिकारियों या संबंधित मंत्रियों से मिलना चाहिए, न कि किसी राजनीतिक या वैचारिक संगठन के कार्यालय में जाकर हाजिरी देनी चाहिए।

    प्रमुख आरोप और चेतावनी

    • निष्पक्षता पर सवाल: पटवारी ने आरोप लगाया कि कलेक्टर ने खुद को साबित कर दिया है कि वे एक प्रशासनिक अधिकारी के बजाय भाजपा कार्यकर्ता के रूप में काम कर रहे हैं।
    • प्रमोशन और सर्विस रूल्स: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्यार से लेकर प्रमोशन तक की लालसा में अधिकारियों को अपने पद की गरिमा नहीं भूलनी चाहिए।
    • सीधी चेतावनी: कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ किया कि अगर अधिकारी अपनी कार्यप्रणाली नहीं सुधारते और निष्पक्ष होकर काम नहीं करते, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी।

    सियासी उबाल
    इस घटना के बाद मध्य प्रदेश में विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस का तर्क है कि जब शहर एक गंभीर जल त्रासदी (भागीरथपुरा मामला) से जूझ रहा है, तब प्रशासनिक प्रमुख का किसी खास विचारधारा के कार्यालय में जाकर “सलाह-मशविरा” करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है।

     

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