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इंदौर: कल दिनभर बदले गए पाइप, सुधार कार्य के साथ पंप फिर से चालू किए

April 09, 2026

फायर सेफ्टी की मॉक ड्रिल में दो लिकेज ने बिगाड़ी थी बात

इंदौर। सुधारीकरण (Reformation) के बाद जांच हुई कि पानी (Water) की पहुंच कहां-कहां तक, कितनी आग बुझा सकता है। नजीर को मिली थी फटकार। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि 2014 के बाद से फायर सेफ्टी (Fire Safety) उपकरणों का इस्तेमाल ही नहीं हुआ। जब से लगाए गए हैं तब से सिर्फ मेंटेनेंस हुआ है, बाकी उपयोग में नहीं आने के कारण कई पाइप कमजोर हो गए हैं, जिनका सुधार कार्य किया गया है। ज्ञात हो कि पूर्व अपर कलेक्टर सपना लोवंशी ने भी अपने कार्यकाल में फायर सेफ्टी के उपकरणों के कई पाइप बदले थे, जो इस्तेमाल में नहीं आने के कारण जंग लगकर सड़ चुके थे।



  • कलेक्टर कार्यालय परिसर में हाल ही में आयोजित फायर सेफ्टी मॉकड्रिल के दौरान दो स्थानों पर पाइप लाइनों में आए लीकेज ने पूरे अभ्यास की गति धीमी कर दी थी, लेकिन लंबे समय से इस्तेमाल में नहीं आने के कारण सिस्टम की वास्तविक स्थिति की जानकारी भी दे दी थी। इसके बाद प्रशासनिक अमले ने तुरंत सुधार कार्य शुरू कराकर पूरे सिस्टम को सुव्यवस्थित करने का निर्णय लिया। मंगलवार को पूरे दिन पाइप बदलने, कमजोर हिस्सों को हटाने और जंग खा चुके जोड़ों को मजबूत करने का काम चलता रहा। देर शाम सभी फायर लाइनें री-चेकिंग के लिए चालू की गईं और पंपों को एक-एक कर टेस्ट किया गया।
    सुधारीकरण के बाद अधिकारियों ने यह भी जांचा कि अब पानी की पहुंच इमारत की किन-किन मंजिलों और हिस्सों तक ठीक तरह से हो रही है। पानी का प्रेशर, ऊंचाई तक फेंकने की क्षमता और आपात स्थिति में पूरे सिस्टम का लोड सहने की योग्यता का परीक्षण किया गया। टीम के सदस्यों ने बताया कि इस बार की जांच खासतौर पर इसलिए महत्वपूर्ण थी, क्योंकि हाल की मॉकड्रिल में प्रेशर गिरने और पाइप फटने की वजह से कार्रवाई बाधित हुई थी। अधिकारियों ने स्वीकार किया कि लंबे समय तक फायर सेफ्टी उपकरणों के वास्तविक उपयोग में न आने से सिस्टम के कई हिस्से कमजोर हो गए थे। टेक्निकल स्टाफ को बुलाकर पूरे सिस्टम की जांच की गई है कि वह कितना प्रेशर झेल सकता है।

    2014 से लगा, इस्तेमाल में नहीं आया
    अपर कलेक्टर रोशन राय के अनुसार 2014 के बाद से फायर सेफ्टी उपकरणों का उपयोग केवल मेंटेनेंस तक सीमित रहा है। नियमित प्रेक्टिकल उपयोग न होने के कारण कई पाइप अंदर से जंग खाकर पतले हो चुके थे। यही वजह है कि मॉकड्रिल के दौरान लीकेज की स्थिति बनी। गौरतलब है कि पूर्व में भी तत्कालीन अपर कलेक्टर सपना लोवंशी ने इसी समस्या को देखते हुए कई पाइप बदलवाए थे। प्रशासन का कहना है कि अब पूरे सिस्टम को अपडेट कर दिया गया है और अगली मॉकड्रिल में किसी भी तरह की बाधा न आए, इसके लिए नियमित जांच की रूपरेखा भी बनाई जा रही है।

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